अब बिना नर्सरी करें धान की सीधी बोआई

कृषि विज्ञान केंद्र मल्हना के कृषि वैज्ञानिक डा. रजनीश श्रीवास्तव के अनुसार जीरो ट्रिल विधि से धान की बोआई मानसून आने के पहले 15-20 जून तक अवश्य कर लेनी चाहिए। ताकि बाद में नमी या जलभराव से पौधे प्रभावित न हो। धान की सीधी बोआई करने के लिए खेत में हल्का पानी देकर उचित नमी पर हल्की जोताई या बिना जोताई किए खेत में जीरो टिल सीड ड्रिल हैपी सीडर या सुपर सीडर मशीन से धान की बोआई की जाती है।

JagranMon, 14 Jun 2021 01:47 AM (IST)
अब बिना नर्सरी करें धान की सीधी बोआई

देवरिया : उचित नमी की अवस्था मे खेत की कम से कम जोताई करके या बिना जोताई किये हुए खेत में जीरो टिल, सीड ड्रिल, हैपी सीडर या सुपर सीडर मशीन के द्वारा धान की सीधी बोआई करने से पैसे व इससे नर्सरी, लेव तथा रोपाई का पैसा बचेगा तथा समय से फसल भी तैयार हो जाएगा। इस तकनीक से लेव लगाने व रोपाई की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे लागत में कमी आती है फसल समय से तैयार हो जाती है। उत्पादन पूरा मिलता है। अगली फसल की बोआई समय से पूरी हो जाती है।

कृषि विज्ञान केंद्र मल्हना के कृषि वैज्ञानिक डा. रजनीश श्रीवास्तव के अनुसार जीरो ट्रिल विधि से धान की बोआई मानसून आने के पहले 15-20 जून तक अवश्य कर लेनी चाहिए। ताकि बाद में नमी या जलभराव से पौधे प्रभावित न हो। धान की सीधी बोआई करने के लिए खेत में हल्का पानी देकर उचित नमी पर हल्की जोताई या बिना जोताई किए खेत में जीरो टिल, सीड ड्रिल, हैपी सीडर या सुपर सीडर मशीन से धान की बोआई की जाती है। जहां खरपतवार की समस्या अधिक आती है। वहां पर बोआई से पहले एक बार पानी लगा कर उगे हुए खरपतवार को जोताई के द्वारा नष्ट किया जाता है। इसके बाद धान की सीधी बोआई की जाती है ।

खरपतवार प्रबंधन हेतु धान की सीधी बोआई करने के 20 से 25 दिन पर बाइसपेरीबैक सोडियम 10 फीसद एससी की 80 से 100 मिलीलीटर मात्रा को प्रति एकड़ की दर से 300 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करते हैं जिससे खरपतवार नष्ट हो जाते हैं।

जिला कृषि अधिकारी मोहम्मद मोजम्मिल जीरो टिल, सीड ड्रिल, हैपी सीडर या सुपर सीडर मशीन के जरिए धान की बोआई करने से किसानों को काफी फायदा होगा। तकनीक के प्रयोग से लागत में कमी आती है। लेकिन समय से बोआई करें तो लाभ होगा। यह बरतें सावधानी

सीधी बोआई में खरपतवार एक प्रमुख समस्या है। लेव न लगाने के कारण खरपतवार की संख्या अधिक होती है। बोआई के दो से तीन दिन के अंदर पेंडीमैथलीन 30 ईसी की सवा लीटर मात्रा को 300 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना चाहिए। छिड़काव करते समय मिट्टी में पर्याप्त नमी हो तथा छिड़काव समान रूप से सारे खेत में करना चाहिए। यह दवा खरपतवार को जमाव से रोक देती हैं। बाद में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार को नष्ट करने हेतु दो-चार डी सोडियम साल्ट की 250 ग्राम मात्रा को प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना चाहिए। खड़ी फसल में उगने वाले खरपतवार को निराई-गुड़ाई करके निकाल देना चाहिए। निचले एवं जलभराव क्षेत्रों में खरपतवारों का जमाव कम होता है। धान की सीधी बोआई से लाभ

नर्सरी उगाने में होने वाले खर्च से बचत होती है। लेव लगाने के लिए जोताई एवं जलभराव के खर्च में पैसा नहीं लगता है। नम खेत में भी जोताई हो जाती है। धान की रोपाई का खर्च बच जाता है। धान की बोआई समय से होने के कारण रबी फसलों के लिए खेत खाली हो जाता है, जिससे रबी फसलों की बोआई समय पर होती है । लेव लगाने से भूमि की भौतिक दशा खराब हो जाती है, इससे भी बचाव हो जाएगा। किसानों की सुनिए

मझौवा के किसान राजेश दूबे कहते हैं कि धान की सीधी बोआई से हम किसानों को काफी फायदा होगा। इस तरीके को अपना कर अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है।रावतपार पाण्डेय के किसान बद्रीनाथ पाण्डेय कहते हैं कि मैं दो वर्ष से धान की सीधी बोआई कर रहा हूं। इससे काफी लाभ मिला है।धोबी गांव के किसान दीनानाथ यादव कहते हैं कि मैं भी इस वर्ष से सीधी धान का बोआई करना प्रारंभ किया हूं। लागत में काफी कमी आई है। वीजापुर झंगटौर के किसान आद्याशंकर कहते हैं कि सीधी बोआई का तरीका सभी किसान को अपनाना चाहिए। यह सरल एवं बचत के साथ समय से फसल तैयार करने का बेहतर तरीका है।

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