बंजरिया मंदिर परिसर में स्थापित की गई देवरहा बाबा की प्रतिमा

युग पुरुष थे देवरहा बाबा श्याम सुंदर दास भजन कीर्तन के बाद विधि विधान से पूजन के बाद की गई प्रतिमा की स्थापना

JagranTue, 27 Jul 2021 11:41 PM (IST)
बंजरिया मंदिर परिसर में स्थापित की गई देवरहा बाबा की प्रतिमा

जागरण संवाददाता, सलेमपुर, देवरिया: हनुमान मंदिर बंजरिया परिसर में मंगलवार को महर्षि देवरहा बाबा की प्रतिमा वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच स्थापित की गई। दो दिनों तक चले भजन कीर्तन के बाद देवरहा बाबा आश्रम के महंथ श्याम सुंदर दास महराज ने फूल माला पहनाकर प्रतिमा को स्थापित किया गया।

श्याम सुंदर दास ने कहा कि देवरहा बाबा युग पुरुष थे। उनकी साधना शुरू से ही मईल में रही। उनके उपदेशों को अमल कर हम अपने को कृतार्थ कर सकते हैं। बरहज आश्रम के महंथ आंजनेय दास ने कहा कि योगीराज देवरहा बाबा ने अपनी साधना के लिए बबूल वन जैसे एकांत स्थान का चयन किया। जिला पंचायत अध्यक्ष गिरीशचंद्र तिवारी ने कहा कि मईल के बाद देवरहा बाबा की ख्याति पूरे विश्व में फैली है। इनके ही नाम पर देवरिया में मेडिकल कालेज का निर्माण हो रहा है। दीर्घेश्वरनाथ मंदिर मझौलीराज के महंत जगरनाथ दास ने कहा कि देवरहा बाबा को अष्टांग योग की सिद्धि प्राप्त हुई थी। प्रभु प्रेम मिशन के संत स्वामी राधारंग ने कहा कि देवरहा बाबा बाबा सरल, शांतचित्त तथा समदर्शी महात्मा थे। मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सूबेदार सिंह ने सभी अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।

इस अवसर पर महंत प्रभात चंद्र मिश्र, प्रधान इंद्रावती सिंह, ओमप्रकाश सिंह, राम विलास तिवारी, अशोक सिंह, सच्चिदानंद शुक्ल आदि लोग उपस्थित रहे। परीक्षित की कथा सुन भावविभोर हुए लोग

जागरण संवाददाता,सलेमपुर,देवरिया: नगर के सेंट जेवियर्स रोड पर चल रहे श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य राघवेन्द्र शास्त्री ने शुकदेव परीक्षित संवाद का प्रसंग सुनाया। जिसमे भागवत कथा श्रवण की महत्ता पर प्रकाश डाला।

कथा में व्यास ने कहा की एक बार परीक्षित महाराज वनों में काफी दूर चले गए। उनको प्यास लगी, पास में शमीक ऋषि के आश्रम में पहुंचे और बोले ऋषिवर मुझे पानी पिला दो मुझे प्यास लगी है, लेकिन शमीक ऋषि समाधि में थे, इसलिए पानी नहीं पिला सके। परीक्षित ने सोचा कि इसने मेरा अपमान किया है मुझे भी इसका अपमान करना चाहिए। उसने पास में से एक मरा हुआ सर्प उठाया और समीक ऋषि के गले में डाल दिया। यह सूचना पास में खेल रहे बच्चों ने समीक ऋषि के पुत्र को दी। ऋषि के पुत्र ने नदी का जल हाथ में लेकर शाप दे डाला जिसने मेरे पिता का अपमान किया है आज से सातवें दिन तक्षक नामक सर्प पक्षी आएगा और उन्हें डस लेगा।

कथावाचक शास्त्री ने राजा परीक्षित के चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि पांच साल की अवस्था में पांडवों ने उन्हे राज्य सौंपा। परन्तु संतों की संगति ने उन्हे महान बना दिया। उन्होंने भारत का चतुर्मुखी विकास कराया।

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