रास्ते के विवाद से आहत वृद्ध ने राप्ती में लगाई छलांग

तट पर मौजूद मछुआरों ने बचाई वृद्ध की जान सूचना पर पहुंची पुलिस ने वृद्ध से की पूछताछ स्वजन को सौंपा

JagranWed, 28 Jul 2021 11:27 PM (IST)
रास्ते के विवाद से आहत वृद्ध ने राप्ती में लगाई छलांग

जागरण संवाददाता, बरहज : गांव में रास्ते के विवाद से आहत एक वृद्ध ने बुधवार को कपरवार स्थित उग्रसेन सिंह सेतु से सरयू नदी में छलांग लगा दी। नदी की तेज धारा में करीब पांच सौ मीटर दूर बहते हुए पहुंच गया था। वृद्ध को नदी में कूदता देख तट पर मौजूद मछुआरों ने जान बचाई। मौके पर पहुंची पुलिस ने वृद्ध से पूछताछ कर स्वजन को बुलाकर घर भेज दिया।

मदनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम मरवटिया निवासी कन्हैयालाल यादव गांव से कपरवार उग्रसेन सिंह पुल पहुंचे और राप्ती नदी में छलांग लगा दिया। राप्ती तट पर मौजूद मछुआरे मुन्ना साहनी, कमलेश साहनी, उमेश साहनी, अंकित साहनी नाव से सरयू व राप्ती नदी के संगम पर पहुंचकर जान बचाई। कन्हैयालाल यादव ने बताया कि उनका गांव के एक व्यक्ति से रास्ते का विवाद है। वह चार साल से रास्ता रोके हुए है। इसी से परेशान होकर नदी में कूद गया। प्रभारी निरीक्षक टीजे सिंह ने बताया कि वृद्ध को मछुआरों ने सुरक्षित बचा लिया। उनके स्वजन को बुलाकर घर भेज दिया गया है। समस्या का समाधान कराया जाएगा। हादसे में युवक की मौत के बाद सदमे में स्वजन

जागरण संवाददाता, भाटपाररानी : फुलवरिया-लार मार्ग पर मंगलवार की देररात रामनगर के समीप मार्ग दुर्घटना में युवक की मौत हो गई। जबकि बाइक सवार पिता गंभीर रूप से घायल हो गए। जिनका इलाज गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। घटना के बाद स्वजन सदमे में हैं।

थाना के भरौली निवासी 18 वर्षीय अर्जुन पिता रमेश प्रसाद गोंड व माता सुनीता के साथ एक ही बाइक पर सवार होकर लार से घर भरौली आ रहे थे। अभी वह रामनगर के समीप पहुंचे थे कि सामने से आ रहे बाइक से टक्कर हो गई। जिससे अर्जुन की मौत हो गई। उनके पिता रमेश प्रसाद गोंड का इलाज गोरखपुर के निजी अस्पताल में चल रहा है। रमेश राजमिस्त्री का काम करते हैं। दो पुत्रों में अर्जुन बड़ा था। वह इलेक्ट्रिशियन का कार्य करता था। घर की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए पिता का हाथ बंटाता था। दूसरा पुत्र अभी छोटा है। घर का कमाऊ सपूत खोने के बाद परिवार सदमे में है। बुधवार को जब अर्जुन की लाश पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंची तो स्वजन रो-रोकर बेसुध हो गए। अंतिम संस्कार चनुकी घाट पर हुआ।

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