महागौरी की घर-घर हुई पूजा अर्चना

महागौरी की घर-घर हुई पूजा अर्चना

सौभाग्य धन संपदा व सौंदर्य प्रदान करने वाली देवी महागौरी की मंगलवार

JagranTue, 20 Apr 2021 09:22 PM (IST)

जागरण संवाददाता, चंदौली : सौभाग्य, धन संपदा व सौंदर्य प्रदान करने वाली देवी महागौरी की मंगलवार को पूजा अर्चना हुई। माता के दर्शन पूजन को देवी मंदिरों में श्रद्धालु की भीड़ लगी। कोरोना संक्रमण के चलते श्रद्धालुओं ने मंदिरों में शारीरिक दूरी का पालन किया और मां का आशीर्वाद लिया। मंदिरों में बज रहे देवी गीतों से माहौल भक्तिमय रहा। मां काली, श्रीराम जानकी शिव मठ मंदिर परिसर के देवी मंदिर, पुरानी बाजार स्थित दुर्गा मंदिर में पुजारी द्वारा हवन किया गया। पुजारी अभय चौबे ने कहा मां का यह स्वरूप जगत का कल्याण करने वाला है। माता स्त्री जनित गुणों की अधिष्ठात्री देवी महागौरी हैं। माता सृष्टि का आधार हैं। अक्षत सुहाग की प्रतीक हैं। देवी के इस रूप की पूजा अर्चना से विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य मिलता है।

पीडीडीयू नगर प्रतिनिधि के अनुसार नगर के देवी मंदिरों में मंगलवार को मां महागौरी व मां सिद्धिदात्री की विधि विधान से पूजा की गई। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की कतार लगी रही। वहीं घरों में लोगों ने हवन पूजन किया। कुंवारी कन्याओं को भोजन कर कर उपहार में नए वस्त्र दिए। सप्तमी सोमवार की मध्य रात्रि 12 बजकर एक मिनट तक रही। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो गई जो 20 अप्रैल को पूरे दिन रही। अष्टमी तिथि 21 अप्रैल को मध्य रात्रि 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी इसीलिए इस बार अष्टमी व नवमी एक ही दिन पड़ी। इस दिन लोगों ने व्रत रखा। महिलाओं ने घरों में पूजा की। सुबह देवी मंदिरों में भक्तों का रेला लगा। नगर के जीटी रोड स्थित प्राचीन काली मंदिर, नईसट्टी स्थित दुर्गा मंदिर, गल्लामंडी स्थित दुर्गा मंदिर, रविनगर स्थित काली मंदिर, लालबहादुर शास्त्री कटरा स्थित दुर्गा मंदिर में भक्तों ने पूजन किया। भक्तों के जयकारे से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था। सुबह ही लोग स्नान करके मंदिरों की तरफ निकल पड़े। महिलाएं, किशोरियां व पुरुषों ने पूरे विधि विधान से पूजन किया।

घरों में हुई कन्या पूजा

नवमी पर घरों में कुंवारी कन्याओं की पूजा की मान्यता है। नगर में कई जगहों पर लोगों ने कन्याओं की पूजा की। उपहार में उन्हें नए वस्त्र दिए। उन्हें भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लिया। छोटी-छोटी नौ कन्याओं को नौ देवियों के रूप में पूजा गया। साथ में हनुमानजी के प्रतीक लांगुरिया की भी पूजा हुई और उन्हें भोजन कराया गया।

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