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चिकित्सकों को रास नहीं आ रहे सरकारी आवास

जासं, चकिया (चंदौली) : संयुक्त चिकित्सालय के चिकित्सकों को सरकारी आवास नहीं भा रहे हैं। यहां तैनात अधिकतर चिकित्सकों के आवास पर ताला लटका रहता है। इससे मरीजों को इलाज में परेशानी उठानी पड़ती है।

ओपीडी में दिखाने के बाद तबीयत खराब हुई तो संबंधित चिकित्सक दूसरे दिन ही मिलते हैं। ऐसे में निजी चिकित्सालयों का सहारा लेना पड़ता है। कहने को तो सौ शय्या वाले संयुक्त चिकित्सालय में चिकित्सकों की लंबी फौज है। सभी को परिसर में आवास मुहैया कराया गया है। आवासों में बिजली, पेयजल, शौचालय, किचन समेत अन्य सुविधाएं मुहैया हैं। बावजूद इसके सरकारी आवास चिकित्सकों को नहीं भा रहे हैं। वाराणसी समेत अन्य महानगरों, शहरों में ही आवास बनाकर रह रहे हैं। सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ओपीडी में ड्यूटी होने के बावजूद अधिकतर चिकित्सक सुबह 10 बजे ही ओपीडी पहुंचते हैं। इससे नौगढ़ सहित अन्य दूरदराज से आए मरीजों की एक दिन जांच तो इलाज दूसरे दिन होता है। सबसे ज्यादा परेशानी दिल के रोगियों को होती है। यहां फिजिशियन की नियुक्ति है। पर रात्रि में सरकारी आवास में रुकना तो दूर, हफ्ते में तीन-चार दिन ही जैसे-तैसे पहुंचते हैं। समाजसेवी मोहन प्रसाद, विजय नारायण, सौरभ कुमार ने सीएम सहित जिले के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर समस्या से निजात दिलाने की मांग की। ''चिकित्सक 24 घंटे अस्पताल परिसर में रहें, इसके लिए उन्हें आवास मिला है। इसके बाद भी वे बाहर रह रहे हैं तो नियम विरुद्ध है। ऐसे चिकित्सकों को चिन्हित कर वेतन रोकने के साथ ही विभागीय कार्रवाई की जाएगी।''

-डा. ऊषा यादव, सीएमएस।

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