बच्चों में लक्षण दिखें तो न करें नजरअंदाज

बच्चों में लक्षण दिखें तो न करें नजरअंदाज

दुनिया के तमाम स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कोरोना की तीसरी लहर को बच्चों

JagranSun, 16 May 2021 08:33 PM (IST)

जागरण संवाददाता, चंदौली : दुनिया के तमाम स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कोरोना की तीसरी लहर को बच्चों के लिए घातक बताया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व जिले के चिकित्सक बाल रोग विशेषज्ञों व चिकित्सकों से सलाह ले रहे हैं। इसी क्रम में वर्चुअल माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े। कोरोना संक्रमण से बच्चों को दूर रखने पर गहन चर्चा की गई। चिकित्सकों ने लोगों को सलाह दी कि बच्चों में कोरोना का कोई भी लक्षण दिखे तो कदापि नजरअंदाज न करें। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाएं और विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाएं। तीसरी लहर की संभावना के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग कोरोना संक्रमित बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल परिसर स्थित एमसीएच (मातृ व शिशु विग) में 30 बेड के एनआइसीयू व 20 वेंटिलेटर युक्त बेड का वार्ड बनाने में जुटा है। वेबिनार के दौरान एसजीपीजीआइ लखनऊ की वरिष्ठ परामर्शदाता पीडियाट्रिशियन डाक्टर पियाली भट्टाचार्य ने कहा बच्चों में कोरोना का कोई भी नए लक्षण नजर आएं उन्हें तत्काल चिकित्सक के पास ले जाएं। बच्चों में डायरिया, उल्टी-दस्त, सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, आंखें लाल होना या सिर व शरीर में दर्द होना, सांसों का तेज चलना आदि कोरोना के लक्षण हो सकते हैं। लक्षण सामान्य होने पर बच्चों को होम आइसोलेशन में रखें। हालांकि यदि बच्चा पहले से बीमारियों से ग्रसित रहा है तो यह खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में चिकित्सक से संपर्क करना बेहद जरूरी है। कहा, बाल सुधार गृह में रह रहे बच्चों का हेल्थ चार्ट बनाया जाना चाहिए। इसको नियमित रूप से भरा जाए। इसमें बुखार, पल्स रेट, आक्सीजन सेचुरेशन, खांसी, दस्त आदि का जिक्र किया जाए। इससे संक्रमित बच्चों के स्वास्थ्य का सही ढंग से आंकलन किया जा सकेगा। यदि कोई बच्चा ज्यादा रोए, गुस्सा करे या गुमशुम रहे तो उस पर भी नजर रखी जानी चाहिए। बोलीं, बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे में उन्हें भोजन में हरी सब्जी, मौसमी फल आदि दिए जाएं। हाई प्रोटीन का भी ख्याल रखा जाना चाहिए। बच्चों को पनीर, मठ्ठा, छाछ, गुड-चना आदि खिलाया जा सकता है। वहीं अंडा, मछली आदि का सेवन भी लाभदायक होगा। तीसरी लहर में बच्चों पर असर होगा। हालांकि अभी तक 18 साल से कम उम्र वालों के लिए टीका नहीं बना है। ऐसे में सावधानी और सतर्कता से ही बीमारी से बच्चों को बचाया जा सकता है। महिला कल्याण विभाग के निदेशक मनोज कुमार राय ने बच्चों को विभिन्न आयु वर्ग में बांटकर उनकी निगरानी व देखभाल पर जोर दिया। वेबीनॉर में सीएमओ डाक्टर वीपी द्विवेदी, सीएमएस डाक्टर भूपेंद्र द्विवेदी व एसीएमओ जुटे।

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