नारायण की भक्ति में समर्पित कर दें अपना मन

बरहनी (चंदौली) मानव का सबसे बड़ा शत्रु मन की चंचलता है। व्यक्ति जब मन के वशीभूत होकर कोई कार्य करे तो नारायण के प्रति उसका ध्यान नहीं जा पाता।

JagranSat, 25 Sep 2021 03:58 PM (IST)
नारायण की भक्ति में समर्पित कर दें अपना मन

जागरण संवाददाता, बरहनी (चंदौली) : मानव का सबसे बड़ा शत्रु मन की चंचलता है। व्यक्ति जब मन के वशीभूत होकर कोई कार्य करे तो नारायण के प्रति उसका ध्यान नहीं जा पाता। इसलिए मन की चंचलता को शांत करना पड़ता है। कहा कि मन की चंचलता तब शांत होगी जब हम अपना मन नारायण की भक्ति में समर्पित कर दे। क्योंकि इसके बाद कोई जिज्ञासा शेष नहीं रह जाती है। उक्त बातें चिरईगांव में चल रहे चातुर्मास यज्ञ के दौरान शनिवार को सुंदर राज जी महाराज ने कहीं।

कहा कि हम कितना भी सौंदर्य प्रसाधन, भोजन, वस्त्र आदि धारण कर लें परंतु मन की चंचलता और बढ़ेगी वो रुकने वाली नहीं है। मन की चंचलता शांत तब होगी जब हम अपना मन शंख धारी चतुर्भुज के चरणों में समर्पित कर दें। इससे मानव के जीवन का कल्याण हो जाता है। जयप्रकाश सिंह, हरवंश सिंह, दिनेश जायसवाल, वंदना सिंह, आकांक्षा सिंह, सरिता आदि श्रद्धालु उपस्थित थे।

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