सैनिक अपने अनुभव साझा कर युवाओं को सही दिशा दिखाएं : प्रवीण तेवतिया

सैनिक अपने अनुभव साझा कर युवाओं को सही दिशा दिखाएं : प्रवीण तेवतिया

26 नवंबर 2008 को मुंबई के ताज होटल में हुए आतंकी हमले में जनपद के जाबांज पूर्व मरीन कमांडो प्रवीण तेवतिया ने शौर्य की दास्तां लिखी है जिन्होंने हमले में खुद कई गोली खाने के बाद भी आतंकवादियों को मौत की नींद सुला दिया था। वह संघर्ष की गाथा को एक किताब का रूप भी दे चुके है जिसमें उन्होंने मुठभेड़ के समय दिक्कतों के साथ चुनौतियों का भी जिक्र किया है।

Publish Date:Thu, 26 Nov 2020 05:04 AM (IST) Author: Jagran

जेएनएन, बुलंदशहर। 26 नवंबर 2008 को मुंबई के ताज होटल में हुए आतंकी हमले में जनपद के जाबांज पूर्व मरीन कमांडो प्रवीण तेवतिया ने शौर्य की दास्तां लिखी है, जिन्होंने हमले में खुद कई गोली खाने के बाद भी आतंकवादियों को मौत की नींद सुला दिया था। वह संघर्ष की गाथा को एक किताब का रूप भी दे चुके है, जिसमें उन्होंने मुठभेड़ के समय दिक्कतों के साथ चुनौतियों का भी जिक्र किया है।

गुलावठी क्षेत्र के गांव भटौना निवासी पूर्व मरीन कमांडो प्रवीण तेवतिया मुंबई आतंकी हमले में आपरेशन टीम का हिस्सा रह चुके है। प्रवीण को अफसोस इस बात का है कि सिस्टम सैनिकों के साथ नहीं है। सैनिकों के साथ धोखा हो रहा है। कहना है कि सैनिक के साथ धोखा देश को धोखा देने जैसा है। लोग स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस या किसी विशेष दिवस पर शहीद स्मारक पर जाकर शहीदों को याद करते है अन्य बाकी दिन उन्हें भूले रहते है इसलिए स्वयं को जागृत करना बेहद जरूरी है और जागृति स्कूल व पाठयक्रम से शुरू होती है। उनका कहना है कि इतिहास गलत लोगों के द्वारा लिखा गया है। आतंकवाद पर कहा कि उन्होंने मुंबई हमले में आतंकवादियों से आधा घंटे की लड़ाई लड़ आपरेशन में सफलता हासिल तो कर ली लेकिन वह 12 वर्षो से कलम वालों से लड़ाई लड़ रहे है। सैनिकों के लिए कोई पालिसी नहीं है और न ही देश व सरकार में कोई हिस्सेदारी है।

प्रवीण पूर्व मरीन कमांडो के साथ आयरनमैन भी है जो युवाओं को यू-टयूब के माध्यम से प्रेरित कर उनका मार्गदर्शन कर रहे है। उनका मानना है कि हर सैनिक का कर्तव्य होना चाहिए कि वह युवाओं को सही दिशा दिखाने के लिए उनसे अपने अनुभव को साझा कर उन्हें प्रेरित करें। --------

दीपक बंसल

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