साहब..कागजी आक्सीजन से नहीं आ रही सांस

साहब..कागजी आक्सीजन से नहीं आ रही सांस

मशहूर शायद अदम गोंडवी की ये पंक्तियां तुम्हारी फाइलों में गांव का रंग गुलाबी है मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावे किताबी हैं..। जिले की मौजूदा परिस्थितियों पर यह दो लाइन सटीक बैठ रही हैं। यहां कोरोना संक्रमित व सांस के मरीज एक-एक सांस के लिए संघर्ष कर रहे हैं मांगने पर आक्सीजन सिलेंडर मिल नहीं रहा है लेकिन अफसर आक्सीजन पर्याप्त होने का दावा कर रहे हैं। रविवार सुबह गांव सलेमपुर में वक्त रहते आक्सीजन न मिलने से महिला तो राधा नगर में अधेड़ ने दम तोड़ दिया है लेकिन साहब अब भी यही कह रहे हैं कि घर पर आइसोलेट मरीजों के लिए आक्सीजन नहीं है। मौखिक रूप से प्राइवेट अस्पतालों को भी नए मरीज भर्ती करने के लिए मना कर रखा है क्योंकि डिमांड के सापेक्ष आक्सीजन की सप्लाई हो नहीं पा रही है।

JagranSun, 02 May 2021 11:32 PM (IST)

बुलंशहर, जेएनएन। मशहूर शायद अदम गोंडवी की ये पंक्तियां, तुम्हारी फाइलों में गांव का रंग गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावे किताबी हैं..। जिले की मौजूदा परिस्थितियों पर यह दो लाइन सटीक बैठ रही हैं। यहां कोरोना संक्रमित व सांस के मरीज एक-एक सांस के लिए संघर्ष कर रहे हैं, मांगने पर आक्सीजन सिलेंडर मिल नहीं रहा है, लेकिन अफसर आक्सीजन पर्याप्त होने का दावा कर रहे हैं। रविवार सुबह गांव सलेमपुर में वक्त रहते आक्सीजन न मिलने से महिला तो राधा नगर में अधेड़ ने दम तोड़ दिया है, लेकिन साहब अब भी यही कह रहे हैं कि घर पर आइसोलेट मरीजों के लिए आक्सीजन नहीं है। मौखिक रूप से प्राइवेट अस्पतालों को भी नए मरीज भर्ती करने के लिए मना कर रखा है, क्योंकि डिमांड के सापेक्ष आक्सीजन की सप्लाई हो नहीं पा रही है।

केस एक:

गांव सलेमपुर की अंगूरी देवी कोरोना संक्रमित हैं। कोविड रिपोर्ट पाजिटिव आने पर डाक्टर की सलाह पर होम आइसोलेट हुई थी। लेकिन दो दिन से अचानक तबीयत बिगड़ने लगी। सांस लेने में परेशानी होने लगी। स्वजन ने आक्सीजन बेड की तलाश की तो वह हो नहीं सकी। हालत ज्यादा बिगड़ी तो स्वजन आधी रात को लेकर जिला अस्पताल इमरजेंसी पहुंचे, वहां आक्सीजन तो लगाई लेकिन एक घंटे बाद बताया कि हालत ज्यादा नाजुक है, वेंटीलेटर चाहिए, इसलिए यहां से ले जाओ। अंतत: सुबह तड़क में अंगूरी देवी की सांस की डोर टूट गई।

केस दो:

नगर के राधा विहार निवासी 48 साल के जितेंद्र ठेकेदार थे। आठ दिन पहले कोरोना संक्रमित हो गए थे। जिसके बाद वह होम आइसोलेट हो गए। लेकिन अचानक शनिवार को तबियत बिगड़ी और सांस आने में दिक्कत होने लगी। स्वजन ने आक्सीजन सिलेंडर पाने की नाकाम कोशिश की, लेकिन रविवार सुबह जितेंद्र की सांसे रूक गई।

केस तीन:

खुर्जा के रहने वाले फूल सिंह भी कोरोना संक्रमित हो गए। लक्षण है नहीं, इसलिए वह होम आइसोलेट हैं। रविवार सुबह से उन्हें भी सांस लेने में दिक्कत हो रही है, ऐसे में स्वजन आक्सीजन रिफ्लिग सेंटर पहुंचे तो बताया गया कि, होम आइसोलेट वाले मरीजों को आक्सीजन देना मना है। इसके बाद फूल सिंह के स्वजन ने अफसरों से सिफारिश लगवाना शुरू किया तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया। अब उनके स्वजन आक्सीजन की तलाश में पड़ोसी जनपद की ओर दौड़ लगा रहे हैं।

इनका कहना है..

डिमांड के सापेक्ष कोविड व नोन कोविड अस्पतालों को आक्सीजन की सप्लाई की जा रही है। हालांकि आक्सीजन व वेंटीलेट बेड फुल हैं, इसके बाद भी हर तरह से मरीज को बचाने की कोशिश की जा रही है।

डा. भवतोष शंखधर, सीएमओ।

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