पौधों की देखरेख में जुटे रहे राघवेंद्र

पौधों की देखरेख में जुटे रहे राघवेंद्र

खुर्जा में रविवार को लाकडाउन के दौरान जहां अधिकांश लोग अपने घरों में कैद रहे। वहीं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य करने वाले राघवेंद्र चौधरी सुबह से लेकर शाम तक पौधों की देखरेख करने में जुटे रहे। नगर की मुरारीनगर श्रीनवदुर्गा शक्ति मंदिर कालोनी निवासी राघवेंद्र चौधरी बचपन से ही पर्यावरण की बिगड़ती दिशा को सुधारने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। पौधे लगाने और उनकी देखरेख करने के चलते ही बचे उन्हें पेड़ वाले अंकल के नाम से जानते हैं।

JagranSun, 18 Apr 2021 11:42 PM (IST)

बुलंदशहर, जेएनएन। खुर्जा में रविवार को लाकडाउन के दौरान जहां अधिकांश लोग अपने घरों में कैद रहे। वहीं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य करने वाले राघवेंद्र चौधरी सुबह से लेकर शाम तक पौधों की देखरेख करने में जुटे रहे। नगर की मुरारीनगर श्रीनवदुर्गा शक्ति मंदिर कालोनी निवासी राघवेंद्र चौधरी बचपन से ही पर्यावरण की बिगड़ती दिशा को सुधारने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। पौधे लगाने और उनकी देखरेख करने के चलते ही बच्चे उन्हें पेड़ वाले अंकल के नाम से जानते हैं। खाली मैदान समेत अन्य स्थानों पर लगाए गए उनके पौधे वर्तमान में पेड़ बनकर लहलहा रहे हैं। रविवार को लाकडाउन के दौरान भी वह अपने घर नहीं बैठे, बल्कि अकेले मास्क पहनकर पौधों की देखरेख करने के लिए सड़क किनारे ओर कई मैदानों में पहुंच गए। जहां उन्होंने दर्जनभर से अधिक पौधों को पानी दिया और उनके आसपास साफ-सफाई की। सुबह से लेकर शाम तक वह अपने इसी कार्य में जुटे रहे। शाम होने पर वह अपने घर लौटे। उन्होंने बताया कि सभी को पौधों की देखरेख करने की दिशा में कार्य करना चाहिए। जिससे पर्यावरण संरक्षित हो सके। अधिकांश ने घरों में रहकर की पूजा-अर्चना

बुलंदशहर में साप्ताहिक लाकडाउन का असर नवरात्र पर भी पड़ा। रविवार को श्रद्धालुओं ने घरों में ही रहकर मांग दुर्गा की उपासना की। कुछ जगहों पर श्रद्धालु सुबह के समय मंदिरों तक पहुंचे, लेकिन मंदिर के गेट बंद रहने से दूर से ही मां के दरबार में हाजिरी लगाई। आचार्य प. श्रीप्रकाश शर्मा ने बताया कि कोरोना महामारी की वजह से मंदिरों में भी सतर्कता बरती जा रही है। सरकार के निर्देश पर लागू साप्ताहिक लाकडाउन का पालन कराया गया। सिर्फ पूजारियों ने मां की पूजा-अर्चना करके भोग लगाया। अधिकांश श्रद्धालुओं ने घरों में मां की पूजा-अर्चना की। जहां मंदिर खुले भी तो वहां श्रद्धालुओं को प्रवेश की इजाजत नहीं मिली। मंदिरों के द्वार बंद रहने से उन्हें दूर से ही मां के दर्शन करने पड़े।

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