आंधी-बारिश से खेत में पड़े गेहूं और आम की फसल को नुकसान

आंधी-बारिश से खेत में पड़े गेहूं और आम की फसल को नुकसान

गुरुवार की देर शाम आई तेज आंधी और बारिश ने लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया। हालांकि गर्मी से कुछ राहत मिली है लेकिन राहत के साथ आम और गेहूं की फसल के लिए आंधी आफत बनकर आई। कृषि मौसम वैज्ञानिक रामानंद पटेल ने बताया कि 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली है। इन दिनों आम में गुठली बनने की प्रक्रिया जारी है और फल में वजन है ऐसे में आम को नुकसान हुआ है।

JagranThu, 06 May 2021 11:30 PM (IST)

बुलंदशहर, जेएनएन। गुरुवार की देर शाम आई तेज आंधी और बारिश ने लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया। हालांकि गर्मी से कुछ राहत मिली है लेकिन राहत के साथ आम और गेहूं की फसल के लिए आंधी आफत बनकर आई। कृषि मौसम वैज्ञानिक रामानंद पटेल ने बताया कि 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली है। इन दिनों आम में गुठली बनने की प्रक्रिया जारी है और फल में वजन है, ऐसे में आम को नुकसान हुआ है।

स्याना, ऊंचागांव, खुर्जा और जहांगीराबाद तथा शिकारपुर क्षेत्र में आम की फसल का उत्पादन अधिक मात्रा में होने के चलते फल पट्टी के नाम से जाना जाता है। जनपद में करीब 11 हजार हैक्टेयर में आम की फसल लहलहा रही है। गुरुवार की देर शाम तेज आंधी आने से आम की फसल को 15 से 20 प्रतिशत नुकसान हुआ है। वहीं, कुछ किसानों के गेहूं की फसल अभी खेतों से नहीं उठी है। हालांकि 70 प्रतिशत तक फसल किसानों ने उठा ली है। मात्र 30 प्रतिशत ही किसान ऐसे हैं जिनके गेहूं की अभी थ्रेसिग नहीं हो पाई हैं। जिला कृषि रक्षा अधिकारी अमरपाल सिंह ने बताया कि तेज आंधी और बारिश से बेल वाली फसलों को कोई नुकसान नहीं है। गन्ने की फसल के लिए बारिश अच्छी है। क्षेत्र में हरे वृक्षों का रोज हो रहा है कटान

स्याना में आज जिस आक्सीजन के लिए तड़प कर लोग अपनी जान दे रहे हैं और हर तरफ आक्सीजन की पुकार है। इसके लिए कहीं न कहीं शासन और प्रशासन जिम्मेदार है। आज पूरा देश कोरोना महामारी के दौर से गुजर रहा है। लोग आक्सीजन नहीं मिल पाने से तड़प-तड़प कर अपनी जान दे रहे हैं। वहीं, नगर-क्षेत्र में प्राण वायु देने वाले हरे वृक्षों का रोज अवैध रूप से कटान हो रहा है। आंकड़े बताते है नगर-क्षेत्र में कोरोना काल में भी लकड़ी माफिया आम के बाग व जमीन से रोजाना हरे पेड़ काट रहे है। यहां तक की 24 घंटे आक्सीजन देने वाले पीपल के पेड़ों को भी नहीं छोड़ रहे हैं। इसमें अहम भूमिका प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस व वन विभाग की है। ये विभाग हरे पेड़ काटने की अनुमति दे रहे हैं। बुधवार की रात नगर स्थित पुलिस क्षेत्रीय अधिकारी कार्यालय से मात्र 200 मीटर दूरी पर लकड़ी माफिया आम के बाग से रातों-रात अवैध रूप से हरे वृक्षों का कटान कर दिन निकलने से पहले ही मौके से गायब हो गए। साक्ष्य मिटाने को हाथों-हाथ पेड़ कटान के बाद उनके गड्ढों को भी भर दिया गया।

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