मादक द्रव्य तस्करों के गिरेबां तक कब पहुंचेंगे पुलिस के हाथ

जेएनएन बुलंदशहर मादक द्रव्य सहित आरोपितों को पकड़कर जेल भेजने वाली पुलिस भले ही अपनी पीठ थपथपा लेती हो लेकिन पर्दे के पीछे नशे का कारोबार करने वाले तस्करों के गिरेबां तक पुलिस ने हाथ नहीं पहुंचते।

JagranWed, 27 Oct 2021 10:48 PM (IST)
मादक द्रव्य तस्करों के गिरेबां तक कब पहुंचेंगे पुलिस के हाथ

जेएनएन, बुलंदशहर

मादक द्रव्य सहित आरोपितों को पकड़कर जेल भेजने वाली पुलिस भले ही अपनी पीठ थपथपा लेती हो लेकिन पर्दे के पीछे नशे का कारोबार करने वाले तस्करों के गिरेबां तक पुलिस ने हाथ नहीं पहुंचते। अवैध कारोबार से जुड़े राजा के खिलाफ कार्रवाई न कर उनके प्यादों को पकड़कर मामले में इतिश्री कर लेती है। आबकारी विभाग हो अथवा पुलिस बरामद मादक ²व्य को कैसे गायब कर देती है, इसकी छानबीन नहीं की जाती। मामूली धाराओं में चालान कर ऐसे आरोपितों को अभयदान दे दिया जाता है। नशे की लत से न सिर्फ इंसान का जीवन बर्बाद होता है बल्कि यह जानलेवा होती है। यह लत न सिर्फ नशा करने वाले व्यक्ति बल्कि उसके परिवार और समाज को भी प्रभावित करती है। इसलिए इसे सिर्फ एक आदत के रूप में ही नहीं बल्कि एक बीमारी के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। 26 जून को अंतराष्ट्रीय मादक ²व्य निषेध और दो अक्टूबर को राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस मनाकर जिला प्रशासन और पुलिस पल्ला झाड़ लेते हैं। जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा जागरुक अभियान की कमी के चलते आमजन भी इस दिशा में सही निर्णय नहीं ले पाता और नशे की गिरफ्त में जीवन बर्बाद कर लेता है।

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सलेमपुर में चल रहा चरस का धंधा

एक सप्ताह पूर्व एसपी सिटी से मिलकर लोगों ने सलेमपुर थाना क्षेत्र के गांव मिर्जापुर निवासी युवक की लिखित शिकायत की थी। ग्रामीणों का आरोप था कि गांव का एक युवक चरस बेचने का कार्य कर रहा है। गांव के 50 प्रतिशत लोगों को चरस की लत लग चुकी है। आरोपित का पिता भी इसी धंधे में लिप्त था और उसकी मौत के बाद बेटे ने क्षेत्र की युवा पीढ़ी को नशे के दलदल में धकेल दिया है। हालांकि पुलिस ने छापेमारी की लेकिन वर्तमान में भी चरस बेचने का धंधा मिर्जापुर, धतूरी सहित आसपास के गांवों में बदस्तूर जारी है।

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सात वर्षों से नहीं हुआ विनिष्टीकरण

आबकारी विभाग प्रति वर्ष बाहरी राज्यों की शराब पकड़ती है और इसकी कीमत करोड़ों में आंकती है। इसके बावजूद सात वर्षों से बरामद अवैध शराब का विनिष्टीकरण आबकारी विभाग ने नहीं किया। आखिर इतनी शराब कहां गई, यह भी आबकारी विभाग पर सवालिया निशान है।

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राष्ट्रीय चेतना मिशन ने की पहल

जिले में दो दर्जन से अधिक सामाजिक संस्थाएं हैं लेकिन नशा मुक्ति के लिए मात्र राष्ट्रीय चेतना मिशन स्कूलों में विद्यार्थियों और गरीब बस्तियों में जाकर मादक द्रव्य पदार्थों के सेवन से होने वाले नुकसान की बाबत जागरुक कर रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष हेमंत शर्मा ने बताया कि एक साल में 100 से 150 स्कूलों, गरीब बस्तियों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर मादक ²व्य निषेध की बाबत आमजन को जागरुक करते हैं। बताया कि कुछ ऐसे परिवार हैं जिनके मुखिया नशे की लत में पड़े और संपति बेचकर शोक पूरे किए और बाद में असमय मौत हो गई।

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इन्होंने कहा..

मादक ²व्य निषेध के लिए दीपावली पर्व के बाद अभियान चलाया जाएगा। सार्वजनिक स्थलों पर शराब आदि के सेवन की शिकायतें आ रही हैं। भूड़ चौराहा, पार्कों और निर्माणाधीन कालोनियों में पुलिस की गस्त बढ़ाई गई है। जल्द ही समस्त थानों में अभियान चलाया जाएगा और मादक द्रव्य के कारोबार से जुड़े लोगों पर सख्ती बरती जाएगी।

-संतोष कुमार सिंह

एसएसपी।

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