प्रधानाचार्य ने छात्रों को पढ़ाया स्वाधीनता का पाठ

दैनिक जागरण की ओर से गुरुवार को माउंट लिट्रा जी स्कूल बिजनौर में संस्कारशाला का आयोजन हुआ।

JagranFri, 17 Sep 2021 06:57 AM (IST)
प्रधानाचार्य ने छात्रों को पढ़ाया स्वाधीनता का पाठ

बिजनौर, जेएनएन। दैनिक जागरण की ओर से गुरुवार को माउंट लिट्रा जी स्कूल बिजनौर में संस्कारशाला का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में स्कूल के प्रधानाचार्य अनुपम शर्मा ने छात्रों को स्वाधीनता संग्राम के आदर्शो का पालन विषय पर पेपर में प्रकाशित लेख व कहानी का पाठ पढ़ाया। छात्रों ने भी प्रधानाचार्य के संबोधन को ध्यान से सुना और अपनी कापियों में भी लिखा।

प्रधानाचार्य अनुपम शर्मा ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम का विशेष ऐतिहासिक महत्व है, इन्हीं संघर्षो के परिणाम स्वरूप हम लोग स्वतंत्रता प्राप्त कर सके और यही वह मूलमंत्र है जो आज तक हम सभी के हृदय एवं मस्तिष्क में राष्ट्रीयता की भावना को संचालित करता रहा है। भारतीय नागरिकों द्वारा पवित्र आदर्शो, ऐतिहासिक अनुभवों से प्रेरणा एवं सीख लेते हुए समानता व एकता के मूलमंत्र के साथ चलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार पिछले 70 सालों में देश के नागरिकों ने संविधान की हर एक बात का पालन किया है। हम सभी देशवासियों को हमारे प्रमुख मूलमंत्र को समझने की आवश्यकता है। हम सभी भारतवासी सौभाग्यशाली हैं। हमें महात्मा गांधी के सत्य, अहिसा और ²ढ़ता के साथ अपनी बात रखना, जैसे आदर्शो को आत्मसात करते हुए देशहित में निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है।

-छात्रा कृतिका वर्मा, कक्षा दस।

प्राचीन भारत के गौरवशाली इतिहास से हम सभी देशवासी परिचित हैं। अनेक उतार चढ़ाव आए। विदेशी शक्तियों ने देश में फूट डालकर अपने हित साधने की कोशिश भी की और सफल भी हुए कितु अंत में एकता और राष्ट्र प्रेम की विजय हुई।

-छात्रा अभिलाषा, कक्षा आठ।

स्वाधीनता संग्राम सेनानियों के सपनों का भारत बनाने के लिए लोगों को गरीबी एवं असमानता से मुक्ति दिलाने विकास के नए अवसर उपलब्ध करने, महिलाओं की आजादी को व्यापक बनाने एवं उनके लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने के साथ साथ युवाओं की प्रतिभाओं को उभारने की आवश्यकता है।

-छात्रा अरफी उस्मानी, कक्षा दस

सदियों की गुलामी के पश्चात 15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हुआ। पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे। सारे भारतवासी उनके अत्याचारों से परेशान हो गए और तब विद्रोह की ज्वाला भड़की और देश के अनेक वीरों ने प्राणों की बाजी लगाई, गोलियां खाईं और अंत: आजादी पाकर ही चैन लिया।

-छात्रा नैंसी चौधरी कक्षा आठ

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