फल-फूल और औषधीय पौधों से महक रही प्रशांत की बगिया

भागदौड़ भरी जिदगी में मनुष्य प्रकृति का सौंदर्य कहे जाने वाले पेड़ पौधों से दूरी बनाता जा रहा है जबकि आक्सीजन का प्राकृतिक स्त्रोत हरे-भरे पेड़ ही हैं। आक्सीजन छोड़ने वाले पेड़ पौधों की कमी कोरोना काल में महसूस भी हुई लेकिन ऐसे भी कई लोग हैं जो अपना जीवन पौधों के लालन-पोषण में गुजार रहे हैं। नगर निवासी प्रशांत शर्मा की जीवन शैली भी कुछ ऐसी ही है।

JagranSat, 19 Jun 2021 10:44 AM (IST)
फल-फूल और औषधीय पौधों से महक रही प्रशांत की बगिया

जेएनएन, बिजनौर। भागदौड़ भरी जिदगी में मनुष्य प्रकृति का सौंदर्य कहे जाने वाले पेड़ पौधों से दूरी बनाता जा रहा है, जबकि आक्सीजन का प्राकृतिक स्त्रोत हरे-भरे पेड़ ही हैं। आक्सीजन छोड़ने वाले पेड़ पौधों की कमी कोरोना काल में महसूस भी हुई, लेकिन ऐसे भी कई लोग हैं जो अपना जीवन पौधों के लालन-पोषण में गुजार रहे हैं। नगर निवासी प्रशांत शर्मा की जीवन शैली भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने अपने घर और आंगन को हरे भरे पौधों की बगिया बना दिया है। जिसमें तरह-तरह के पौधे लगे हैं। कहा जाए तो फल-फूल व औषधीय पौधों से सजी यह बगिया प्रकृति प्रेम को दर्शाती है।

मोहल्ला कायस्थान निवासी प्रशांत शर्मा वैसे तो एक स्कूल में प्राइवेट शिक्षक हैं, लेकिन वर्षों से ही उन्हें पेड़ पौधों से बहुत लगाव है। सुबह शाम उनका समय उनकी देखरेख और लालन-पोषण में बीतता है। सुबह उठते ही सबसे पहले पौधों को संजोना और उन्हें पानी देना, उसके बाद गमलों व अन्य बर्तनों में लगे पौधों की निराई करना उनकी दिनचर्या है। भले ही वह बड़े स्तर पर इस कार्य को न कर रहे हों, लेकिन अपने मकान में बनाई छोटी से बगिया से वह दूसरों को संदेश दे रहे हैं। आंगन से लेकर छत तक हरियाली ही हरियाली नजर आती है। उन्होंने अपने घर में बनी बगिया में अमरूद, तुलसी, रजनीगंधा, कई रंगों की अपराजिता, चंपा, चमेली, चांदनी, एलोविरा, मधु मालती, चोरा-चोरी, इलायची, चीकू के अलावा औषधीय पौधे लगा रखे हैं। वहीं, इस बगिया में लगे विभिन्न प्रकार के पौधे घर-आंगन के अलावा मोहल्ले को महकाते हैं। पौधों को देख उनके अंदर प्रकृति प्रेम छलकता है और लोगों को प्रेरित करता है।

वर्षों पुराना है प्रकृति के प्रति प्रेम

प्रशांत शर्मा ने बताया कि उनके पिता रामौतार शर्मा को भी पेड़ पौधों से बहुत प्रेम है, लेकिन बीमार होने के चलते वह उनकी देखभाल नहीं कर पाते। अब वह अपने पिता से प्रेरित होकर पेड़ पौधों की सेवा कर रहे हैं। करीब 21 वर्षों से अधिक समय से उन्होंने अपने घर आंगन में विभिन्न पौधों को रोप रखा है। कोरोना काल में और बढ़ा प्रेम

कोरोना महामारी के बीच आक्सीजन की कमी किसी से छिपी नहीं। तो कोरोना काल में खाली समय भी भरपूर मिला। इस दौरान उन्होंने औषधीय पौधों को एकत्र किया और उन्हें संवारने में अपना समय बिताया। बड़ी संख्या में औषधीय पौधे रोप कर उनका लालन-पोषण किया।

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