अब तो खड़ी-खड़ी जंग खाने लगी हैं रोडवेज बसें

नजीबाबाद क्षेत्र में रोडवेज बस सेवा को मजाक बनाकर रख दिया गया है। उत्तराखंड की सीमा से सटे नजीबाबाद स्थित रोडवेज डिपो से उत्तराखंड और दिल्ली राज्य के अलावा नेपाल बॉर्डर और दूरस्थ क्षेत्रों में बसे जाती हैं। नजीबाबाद डिपो पर कागजों में करीब छह दर्जन बसों का बेड़ा है लेकिन इनमें ज्यादातर कामचलाऊ हैं।

JagranFri, 17 Sep 2021 02:23 PM (IST)
अब तो खड़ी-खड़ी जंग खाने लगी हैं रोडवेज बसें

जेएनएन, बिजनार। नजीबाबाद क्षेत्र में रोडवेज बस सेवा को मजाक बनाकर रख दिया गया है। उत्तराखंड की सीमा से सटे नजीबाबाद स्थित रोडवेज डिपो से उत्तराखंड और दिल्ली राज्य के अलावा नेपाल बॉर्डर और दूरस्थ क्षेत्रों में बसे जाती हैं। नजीबाबाद डिपो पर कागजों में करीब छह दर्जन बसों का बेड़ा है, लेकिन इनमें ज्यादातर कामचलाऊ हैं। हालात ऐसे हैं कि अब लोकल स्तर की बस सेवा भी ठीक से नहीं चल पा रही है।

नजीबाबाद रोडवेज डिपो से लोकल में बिजनौर, हरिद्वार और कोटद्वार के बीच बसें चलाने पर काफी जोर रहता है। इन तीनों रूट पर करीब दो दर्जन बसें चलाई जाती हैं। इस समय अधिकांश बसों में तकनीकी खराबी और टायर कमजोर होने के कारण आधे से ज्यादा बसें डिपो परिसर में बेकार खड़ी हैं। इन हालातों में न केवल डिपो की आय को चूना लग रहा है, बल्कि स्थानीय और दूरस्थ क्षेत्र में जाने वाले यात्री परेशान हैं। मेरठ-पौड़ी हाईवे से जुड़ा कोटद्वार मार्ग बेहद खराब होने से रूट पर गिनी-चुनी बसें ही रह गई हैं। यही हालत हरिद्वार मार्ग की थी है। घिसे टायरों और तकनीकी खामियों के चलते चालक भी बसों को रूट पर ले जाने से कतरा रहे हैं।

-इनका कहना है

पिछले काफी समय से आवश्यक सामान की डिमांड मुख्यालय से की जा रही है। सामान के अभाव में मरम्मत नहीं हो पा रही है। विगत सप्ताह और आज ही चार-चार टायर मिले हैं। अभी भी टायरों के अभाव में दर्जनभर बसें खड़ी हैं। इसके बाद मेकेनिकल कमी को दुरुस्त किया जाना है।

-डोजीलाल, सीनियर फोरमैन नजीबाबाद

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