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सप्ताह में तीन दिन दुकानें खुलने से व्यापारी आहत

बिजनौर, जेएनएन। कोरोना संक्रमण के चलते करीब तीन माह तक लॉकडाउन रहा। कई पाबंदी के साथ लॉकडाउन खोला गया। प्रशासन के निर्देश पर कोई भी व्यापारी मात्र तीन दिन ही अपने प्रतिष्ठान खोल पा रहा है। सप्ताह में मात्र तीन दिन दुकानें खुलने से व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि इस नीति से कारोबार पटरी पर नहीं लौट पा रहा है। कोरोना संक्रमण के मकड़जाल में फंसकर न सिर्फ लोगों की जान जा रही है। अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। 304 लोग पीड़ित हो चुके हैं। 220 लोग ठीक भी हुए हैं, लेकिन लोगों में दहशत बरकरार है। दहशत इतनी कि लोग बाजार को कम निकल रहे हैं। आवश्यक खरीददारी ही कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण ने लोगों का व्यापार भी चौपट कर दिया है। लगातार करीब तीन माह तक लॉकडाउन रहने के बाद जब अनलॉक हुआ तो तरह-तरह की पाबंदियों के साथ बाजार खोला गया। बाजार खुले, लेकिन इस तरह कि प्रत्येक व्यापारी मात्र तीन दिन ही दुकान खोल सके। यानि कुछ व्यापारी एक दिन छोड़कर अपनी दुकानें खोलेंगे, जबकि दूसरे दिन दूसरे व्यापारी दुकान खोलेंगे। रविवार को बाजार पूरी तरह बंद रहता है। पहले भी साप्ताहिक बंदी के दिन बाजार बंद रहते थे। लेकिन चाय, बीड़ी सिगरेट, मिठाई एवं गली मोहल्लों की दुकाने खुला करती थी। रविवार को साप्ताहिक बाजार बंदी का दिन घोषित होने के बाद गली मोहल्लों की दुकानें भी बंद कराई जाने लगी है। सप्ताह में मात्र तीन दिन दुकान खुलने से व्यापारियों में रोष है। व्यापारियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में न तो ग्राहक ही आता है और न ही बिक्री हो पाती है। देहात क्षेत्र का ग्राहक ने तो बाजार आना की करीब करीब बंद ही हो गया है। व्यापारियों की आय कम होने के बावजूद व्यापारियों के नौकरों का वेतन, दुकान किराया, लाइसेंस फीस, घर के खर्च आदि स्थाई खर्च ज्यों के त्यों बने रहते हैं। व्यापारी नेता मुनीश त्यागी का कहना है कि व्यापारी परेशान हैं। अब कोरोना का कहर अपेक्षाकृत कम हुआ है। लोग आने वाले समय में बेहतर की उम्मीद कर रहे हैं। व्यापारियों की परेशानी को देखते हुए प्रशासन को चाहिए कि वह अब सप्ताह के छह दिन बाजार खोलने की अनुमति प्रदान करे, ताकि व्यापारी वर्ग रोजी रोटी कमा कर परिवार का भरण-पोषण कर सके। वरना ऐसा ही रहा तो व्यापारियों के सामने भूखों मरने की नौबत आ जाएगी।

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