चुटकियों में सीखा काम, अब कमाई ही कमाई

तीन मंडलों के 14 जनपदों से जुड़े मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र से आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की तीन गांवों की 10 महिलाओं को रोजगार मिलना शुरू हुआ है। यह महिलाएं सोलर चरखे पर धागा बनाकर आजीविका कमा रही हैं। केंद्र का लक्ष्य धागा बनाने एवं सिलाई का प्रशिक्षण देकर करीब 50 महिलाओं को रोजगार मुहैया कराना है।

JagranSat, 25 Sep 2021 06:37 AM (IST)
चुटकियों में सीखा काम, अब कमाई ही कमाई

जेएनएन, बिजनौर। तीन मंडलों के 14 जनपदों से जुड़े मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र से आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की तीन गांवों की 10 महिलाओं को रोजगार मिलना शुरू हुआ है। यह महिलाएं सोलर चरखे पर धागा बनाकर आजीविका कमा रही हैं। केंद्र का लक्ष्य धागा बनाने एवं सिलाई का प्रशिक्षण देकर करीब 50 महिलाओं को रोजगार मुहैया कराना है।

उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड का मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र गांव अकबरपुर चौगांवा में संचालित है। केंद्र से मुरादाबाद, मेरठ और सहारनपुर मंडल के 14 जनपद जुड़े हैं। इन जनपदों की महिलाओं को रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए केंद्र की ओर से इन जनपदों में पहुंचकर महिलाओं को नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जनपद बिजनौर की महिलाओं को प्रशिक्षण केंद्र पर ही दिया जाता है। प्रशिक्षण शिविर संचालित न होने की स्थिति में बंद पड़ी मशीनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए केंद्र द्वारा क्षेत्रीय महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया, ताकि बंद मशीनें चलती रहें और महिलाएं आजीविका कमा सकें। इस समय केंद्र पर गांव अकबरपुर चौगांवा की छह और गजरौला एवं खानपुर की दो-दो महिलाएं धागा बना रही हैं। यहां संसाधन हैं, मगर रुचि नहीं

प्रशिक्षण केंद्र पर 20 सोलर चरखे और 20 इलेक्ट्रिक सिलाई मशीनें हैं। सोलर चरखों पर अलग-अलग गुणवत्ता का धागा बनता है, जबकि इलेक्ट्रिक मशीनों पर आधुनिक तकनीक के साथ सिलाई की जाती है। अक्सर लोग संसाधनों के अभाव का रोना रोते हैं, लेकिन यहां संसाधन होने के बावजूद महिलाएं नहीं पहुंच रही हैं। बोलीं महिलाएं:

-जुलाई से सोलर चरखे पर कताई का काम कर रही हूं। रोजाना करीब तीन किलोग्राम सूत कात रही हूं। जिससे मुझे लगभग 600 रुपये की आमदनी होती है। मैं खुद को आत्मनिर्भर महसूस कर रही हूं।

-नीलम, गांव अकबरपुर चौगांवा

---- सोलर चरखे पर कताई करते हुए मुझे करीब तीन महीने होने जा रहे हैं। मैं रोजाना करीब दो किलोग्राम सूत कातकर 450-500 रुपये कमा लेती हूं। प्रशिक्षण केंद्र को उत्पादन केंद्र के रूप में देखकर अच्छा लगा।

-मीना, अकबरपुर चौगांवा

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इनका कहना है:

जारी वित्तीय वर्ष में पुरुष वर्ग को माटी कला एवं अन्य ट्रेड तथा महिला वर्ग को सोलर चरखा एवं इलेक्ट्रिक मशीन का प्रशिक्षण दिया गया। वित्तीय वर्ष में 1037 लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य था। 912 को प्रशिक्षित किया जा चुका है। शेष को अक्टूबर के अंत तक प्रशिक्षण दे दिया जाएगा।

-सोमप्रकाश, प्राचार्य, मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र, अकबरपुर चौगांवा

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