कृष्णायन गोशाला, जहां होती है 2200 गायों की सेवा

बिजनौर जेएनएन। गोशाला में अलग-अलग नस्ल की हजारों गाय। इनके खाने-पीने, आराम और चिकित्सा का माकूल इंतजाम। इतना ही नहीं गायों का जीवन मानव जीवन के अनुकूल। जी हां, कुछ ऐसा ही नजारा है यूपी-उत्तराखंड सीमा पर स्थित कृष्णायन गोशाला का।

उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड सीमा पर स्थित कृष्णायन गोशाला की स्थापना वर्ष 2011 को मात्र 10 गायों के साथ महाराज ईश्वरदास ने की थी। ये गोशाला घने जंगल के बीच गंगा के किनारे पर बनी है। महाराज ईश्वरदास की लगन और मेहनत से आज गोशाला में दो हजार से ज्यादा गाय हैं। यह गाय अलग-अलग नस्ल की हैं। गोशाला मे बदरी, राठी, जगली, लालसींग, गीर, साहीवाल आदि नस्लों की गाय है। कृष्णायन गोशाला उन लोगों के लिए एक मिसाल बनी है, जो गऊ पालन के नाम पर धन जुटाने की लालसा रखते हैं।

कृष्णायन गोशाला की सबसे बड़ी विशेषता तो यह है कि यहां अधिकांश गाय ऐसी हैं, जिनसे दूध प्राप्त नहीं होता है। फिर भी गायों के कुटुंब का अहम हिस्सा हैं। दूध उत्पादित करने वाली गायों के समान ही उनके खाने-पीने का इंतजाम किया जाता है। इतना ही नहीं यहां पर दुर्घटना में घायल हुईं या फिर बीमार गायों का इलाज भी किया जाता है। गोशाला पर गोमूत्र का अर्क निकालकर दवाई बनाई जा रही है। गाय के गोबर से सीएनजी गैस बनाई जा रही है। इसके साथ ही फसलों के लिए कीटनाशक दवाई बनाई जा रही है।

कृष्णायन गोशाला के अध्यक्ष ईश्वरदास महाराज कहते हैं कि गाय कुदरत का अनमोल तोहफा और भारतीय संस्कृति का विशेष अंग है। न केवल गाय का दूध अमृत के समान है, बल्कि गोमूत्र और गोबर किसी औषधि से कम नहीं हैं। उनका कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को किसी समय गोशाला भ्रमण का न्यौता दे रखा है। उन्होंने चार नवंबर को योगी के गोशाला पर पहुंचने की संभावना व्यक्त की है।

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