दारोगा ने बुनी थी बंधक बनाने की कहानी

युवती के आरोप पर हो रही जांच में ग्रामीण राजस्व व पुलिसकर्मी समेत दो दर्जन से अधिक लोगों के बयान लिए गए। ग्रामीणों ने युवती द्वारा लगाए गए अधिकांश आरोप सही बताए हैं। युवती का आरोप है कि अश्लील मैसेज भेजने के विरोध पर दारोगा दीपक सिंह के धमकाया।

JagranTue, 23 Mar 2021 11:39 PM (IST)
दारोगा ने बुनी थी बंधक बनाने की कहानी

बस्ती : अश्लील मैसेज भेजने के विरोध पर उत्पीड़न करने वाले आरोपित दारोगा दीपक सिंह ने युवती और उसके परिवार वालों को फंसाने के लिए बंधक बनाने की कहानी गढ़ी थी। ग्रामीणों ने बयान दिया है कि दारोगा को बंधक नहीं बनाया गया। एडीजी और आइजी इन बयानों के साथ दारोगा द्वारा उस समय कराई गई एफआइआर की भी जांच कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि एफआइआर में कई बिंदुओं की अनदेखी की गई है। हालांकि सत्य क्या है, जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही पता चलेगा।

युवती के आरोप पर हो रही जांच में ग्रामीण, राजस्व व पुलिसकर्मी समेत दो दर्जन से अधिक लोगों के बयान लिए गए। ग्रामीणों ने युवती द्वारा लगाए गए अधिकांश आरोप सही बताए हैं। युवती का आरोप है कि अश्लील मैसेज भेजने के विरोध पर दारोगा दीपक सिंह के धमकाया। फिर भी उसकी बात नहीं मानी तो 13 जून 2020 को चकरोड की पैमाइश के दौरान वह दबंगई पर उतर आया। महिलाओं के साथ हाथापाई हुई। चर्चा है कानूनगो और लेखपाल के बयान में भी बंधक बनाए जाने की बात सामने नहीं आई है। जबकि दारोगा की ओर से कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई एफआइआर में कहा गया था कि महिलाओं और पुरुषों ने जान से मारने की नीयत से लेखपाल, कानूनगो और मुझपर हमला किया था। मेरा शस्त्र छीनने की कोशिश की और बंधक बनाकर घर ले गए। किसी व्यक्ति की सूचना पर आई पुलिस की गाड़ियों की आवाज सुनकर मेरा मोबाइल फेंककर भाग गए। वाकये के समय दारोगा दीपक सिंह कोतवाली थाना की सोनूपार चौकी का प्रभारी था।

बंधक बनाने की सूचना किसने दी, मौके पर कौन-कौन पुलिस कर्मी पहुंचा, क्या कार्रवाई की, जांच टीम ने इस संबंध में भी तथ्य जुटाए। चर्चा है कि एफआइआर में कई तथ्य छोड़े गए हैं। थाने के पुलिसकर्मी दारोगा की बातों में आ गए और एकतरफा कार्रवाई की जाने लगी। निलंबित तत्कालीन सीओ गिरीश कुमार सिंह ने गहनता से जांच नहीं की। हटाए गए एएसपी रवींद्र कुमार सिंह ने सरसरी तौर पर जांच कर मामला निपटा दिया। इससे दारोगा का मन बढ़ता गया और वह उत्पीड़न की कार्रवाई करता गया। दारोगा के भाई समेत नौ आरोपित पुलिसकर्मियों का गैर जनपद तबादला

युवती के उत्पीड़न मामले में नामजद नौ आरोपित पुलिसकर्मियों का मंगलवार रात जोन के अलग-अलग जनपदों में स्थानांतरण कर दिया गया। इंस्पेक्टर शीला यादव को श्रावस्ती, मुख्य आरोपित दारोगा दीपक सिंह के भाई एसआइ राजन सिंह को बलरामपुर, एसआइ अभिषेक सिंह को महराजगंज भेज दिया गया। मुख्य आरक्षी अवधेश कुमार, संजय कुमार व महिला आरक्षी दीक्षा को सिद्धार्थनगर, महिला आरक्षी नीलम को गोंडा, आरक्षी पवन कुशवाहा व आलोक कुमार को कुशीनगर भेजा गया है। गौर थाने के प्रभारी निरीक्षक रहे पंकज कुमार और छावनी के थानाध्यक्ष सर्वेश राय को भी रिलीव कर दिया गया है। इन दोनों का प्रशासनिक आधार पर पहले ही तबादला हुआ था। दोपहर को बस्ती पहुंचे एडीजी अखिल कुमार ने कहा भी था कि जांच निष्पक्ष हो और कोई इसे प्रभावित न कर सके, इसके लिए युवती की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमें में जो भी आरोपित पुलिस कर्मी हैं, उनको गैरजनपद स्थानांतरित किया जाएगा। राजस्व कर्मियों के मामले में मंडलायुक्त निर्णय लेंगे। संतकबीर नगर के सीओ करेंगे विवेचना

एडीजी अखिल कुमार ने बताया कि युवती के उत्पीड़न मामले की जांच सीओ कोतवाली आलोक प्रसाद कर रहे हैं। जल्द ही इसकी विवेचना संतकबीर नगर के सीओ को सौंप दी जाएगी। संतकबीर नगर के एसपी डा.कौस्तुभ शुरू से जांच में लगे हैं। वह इसकी मानीटरिग भी करते रहेंगे। जांच रिपोर्ट तैयार करने को हुआ मंथन

एडीजी अखिल कुमार ने आईजी रेंज कार्यालय में काफी देर तक जांच से जुड़े संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की। आइजी अनिल कुमार राय, एसपी संतकबीरनगर डा.कौस्तुभ और जिलाधिकारी बस्ती सौम्या अग्रवाल मौजूद रहे। मंडलायुक्त अनिल कुमार सागर ने बताया कि जांच पूरी हो चुकी है। रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

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