आज से श्रावण मास का शुभारंभ, शिव मंदिरों में होगा जलाभिषेक

लोगों में कोरोना संक्रमण को लेकर पहले जैसा भय नहीं दिख रहा है। धार्मिक स्थलों के खुलने के बाद वहां श्रद्धालुओं का आवागमन पहले जैसा होने लगा है। ऐसे में श्रावण मास में जिले के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी स्वाभाविक है।

JagranSat, 24 Jul 2021 11:11 PM (IST)
आज से श्रावण मास का शुभारंभ, शिव मंदिरों में होगा जलाभिषेक

बस्ती: रविवार से श्रावण मास शुरू हो रहा है। इस बार शिवभक्त अपने आसपास के ही शिवालयों में जलाभिषेक कर सकेंगे। कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए परंपरागत कांवड़ यात्रा स्थगित कर दी गई है। जलाभिषेक वाले मार्गों पर सुरक्षा की दृष्टि से प़ुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। पंडित शैलेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि श्रावण मास भगवान शंकर का महीना माना जाता है। इस माह शिवभक्त प्रत्येक दिन शिव का जलाभिषेक कर पूजन-अर्चन करते हैं। मान्यता है कि श्रावण मास में भागवान शिव धरती पर भक्तों के बीच रहते हैं।

लोगों में कोरोना संक्रमण को लेकर पहले जैसा भय नहीं दिख रहा है। धार्मिक स्थलों के खुलने के बाद वहां श्रद्धालुओं का आवागमन पहले जैसा होने लगा है। ऐसे में श्रावण मास में जिले के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी स्वाभाविक है। अपर पुलिस अधीक्षक दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे श्रावण मास में आसपास के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करें। कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन अवश्य करें। भद्रेश्वरनाथ शिव मंदिर

जिला मुख्यालय से आठ किमी दूर बाबा भद्रेश्वर नाथ का धाम है। कुआनो नदी के तट पर स्थित यह शिव मंदिर प्राचीन महात्म्य को समेटे हुए है। किंवदंति है कि त्रेताकाल में यह स्थल भद्रेश जंगल नाम से प्रसिद्ध था। रावण ने इस जंगल में विश्राम किया था। भगवान शिव की आराधना के लिए उसने ही यहां शिवलिग की स्थापना की थी। कालांतर में एक पुजारी को स्वप्न में भद्रेश जंगल में शिवलिग होने का स्वप्न दिखा। तभी से यह सर्वविदित हुआ। वर्तमान समय में मंदिर परिसर काफी विशाल है। इस शिवालय की मान्यता सदियों से है। प्रत्येक सोमवार को जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का यहां तांता लगा रहता है। जिले के अन्य प्रमुख शिव मंदिर

बेहिलनाथ शिव मंदिर- बनकटी विकास खंड के बस्ती शहर से 16 वें किमी पर स्थित बेहिलनाथ मंदिर प्राचीन कालीन है। कहा जाता है कि यह बौद्ध काल का मंदिर है। यहां स्थापित शिवलिग अपने आप में अनूठा है। इस स्थान पर प्राचीन टीले हैं। जागेश्वरनाथ शिव मंदिर

हाईवे पर गोटवा से तकरीबन एक किलोमीटर आगे तिलकपुर में जागेश्वरनाथ शिव मंदिर स्थापित है। यहां पर्यटन विभाग की ओर से एक भव्य गेट, इटरलाकिग सड़क, हाईमास्ट लाइट, धर्मशाला आदि का निर्माण कराया गया है। सोमवार के साथ ही श्रावण मास में यहां प्रतिदिन शिवभक्त जलाभिषेक करने आते हैं।

थालेश्वरनाथ शिव मंदिर

बनकटी से तीन किलोमीटर उत्तर थाल्हापार गांव में स्थित यह मंदिर प्राचीन कालीन है। गांव से 15 मीटर ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर पर्यटन विभाग की सूची में दर्ज है तथा यहां पर्यटकों के ठहरने के लिए सरकार की ओर से चार कमरे भी बनाए गए हैं। मोक्षेश्वरनाथ शिव मंदिर

लालगंज में कुआनो मनोरमा नदी के संगम पर स्थित इस मंदिर पर प्रतिवर्ष चैत्र पूर्णिमा पर तीन दिन का मेला लगता है, जहां दूर-दूर से श्रद्वालु आते हैं। मंदिर प्राचीन काल का है। भारीनाथ शिव मंदिर

बस्ती-टिनिच मार्ग पर हरदी गांव से तकरीबन डेढ़ किलोमीटर दूर भारीनाथ शिव मंदिर स्थित है। मुख्य मंदिर में शिवलिग स्थापित है। हर सोमवार को यहां श्रद्धालु शिवलिग का जलाभिषेक करने आते हैं। श्रावण मास के तेरस और महाशिवरात्रि को मंदिर परिसर में बड़ा मेला लगता है।

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