गांवों में खाली हैं पशु आश्रय स्थल, फोरलेन बना बसेरा

गांवों में खाली हैं पशु आश्रय स्थल, फोरलेन बना बसेरा
Publish Date:Mon, 28 Sep 2020 06:04 AM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता, विक्रमजोत, बस्ती : बेसहारा पशुओं को आश्रय स्थल में रखने की प्रशासनिक कवायद कागजी बनकर रह गई है। गांवों में बनाए गए पशु आश्रय स्थल देखरेख करने वाला कोई नहीं है। सफाईकर्मियों के भरोसे यह व्यवस्था छोड़ दी गई है। सबसे खराब स्थिति विक्रमजोत विकास क्षेत्र में देखने को मिल रही है। यहां बेसहारा पशु फोरलेन किनारे घूम रहे हैं। प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा किसान व राहगीरों दोनों को उठाना पड़ रहा है।

क्षेत्र में बेसहारा पशु किसान व यात्री दोनों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। किसान रातभर जाग कर फसल की रखवाली करने को मजबूर हैं। यही नहीं संपर्क मार्गों के साथ ही हाईवे के किनारे व डिवाइडर पर लगे पौधों व झाड़ियों के बीच में बेसहारा पशुओं का झुंड देखने को मिल जाएगा। चौकड़ी टोल प्लाजा से जिले की सीमा घघौवा तक हाईवे पर 27 किमी तक किनारे पशु विचरण करते हैं। दिन में यह बेसहारा पशु खेतों में घूमते हैं और शाम होते ही हाईवे पर पहुंच जाते हैं। इन दिनों सरयू नदी में बाढ़ के चलते माझा क्षेत्र पानी में डूब गया है। खेतों में बैरिकेडिग व रखवाली के चलते बेसहारा पशु अपनी भूख मिटाने के लिए सैकड़ों की संख्या में हाईवे पर आ गए हैं। इनका आतंक इतना बढ़ गया है कि रात को हाईवे पर ही कब्जा कर लेते हैं जिससे जाम की नौबत आ जाती है। वाहन चालक वाहन खड़ा करके खुद की जान जोखिम में डालकर इन पशुओं को हटाते हैं, फिर अपना वाहन लेकर आगे जाते हैं। हाईवे पर खेसुवा, पचवस, मझौवा, रमहटिया, विक्रमजोत, पठकापुर, खतमसराय, केशवपुर, घघौवा आदि स्थानों पर बेसहारा पशुओं ने डेरा जमा रखा है। इन पशुओं के चलते आएदिन हादसे भी हो रहे हैं। यात्री मनोज कुमार सिंह, विजय कुमार पांडेय, सुबाष चौबे, प्रमोद कुमार तिवारी, जगदंबा प्रसाद यादव, अजीत प्रताप सिंह ने कहा कि बेसहारा पशुओं के आतंक से हाइवे सहित संपर्क मार्गों पर चलना मुश्किल हो गया है।

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पशु आश्रय स्थलों में पशुओं के न रहने और फोरलेन पर इनके आने की जानकारी नहीं है। खंड विकास अधिकारी विक्रमजोत से इसकी जांच कराई जाएगी। मामला सही पाए जाने पर कार्रवाई होगी।

आनंद सिंह श्रीनेत, उपजिलाधिकारी हर्रैया

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