विश्व हिंंदी दिवस : अमेरिका में हिंदी की अलख जगा रहीं पॉमेला, यूनिवर्सिटी ऑफ नार्थ कैरोलिना में दे रही हिंदी का लेक्चर

विश्व हिंंदी दिवस : अमेरिका में हिंदी की अलख जगा रहीं पॉमेला

अमेरिका की कैलीफोर्निया की रहने वाली पॉमेला लोथस्पाइच हमारे देश की राष्ट्रभाषा हिंदी से प्रभावित हैं। उन्होंने खुद हिंदी को समझा पढ़ा और अब वह यूनिवर्सिटी ऑफ नार्थ कैरोलिना में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर हिंदी के लेक्चर दे रही हैं।

Ravi MishraSun, 10 Jan 2021 12:33 PM (IST)

बरेली, अंकित गुप्ता। भारतीय संस्कृति, इतिहास, धार्मिक स्वतंत्रता के साथ ही यहां की भाषाओं ने विदेशियों को अपनी ओर आकर्षित किया है। अमेरिका की कैलीफोर्निया की रहने वाली पॉमेला लोथस्पाइच हमारे देश की राष्ट्रभाषा हिंदी से प्रभावित हैं। उन्होंने खुद हिंदी को समझा, पढ़ा और अब वह यूनिवर्सिटी ऑफ नार्थ कैरोलिना में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर हिंदी के लेक्चर दे रही हैं।

पामेला हिंदी को जानने-समझने के बाद से ही इसमें रम गईं। इसके बाद से वह अमेरिका में हिंदी के विस्तार में लगी हैं। इसी दौरान उन्हें बरेली के कथावाचक राधेश्याम द्वारा रचित रामायण की जानकारी हुई। रामायण पढ़ने के बाद उसे जानने समझने की इच्छा उन्हें बरेली तक खींच लाई। पामेला ने 1939 से 1959 के बीच आए राधेश्याम रामायण के सभी संस्करणों का गहन अध्ययन किया। शोध कर चुकीं पामेला बताती हैं कि कथावाचक राधेश्याम के 1959-60 में आए संस्करण में शुद्ध हिंदी के शब्दों का प्रयोग किया गया। अध्ययन के दौरान उनका कई बार भारत और खास तौर पर बरेली आना हुआ।

यहां आसपास होने वाली रामलीला को उन्होंने देखा। सुभाष नगर की रामलीला में तो उन्होंने केवट की पत्नी की भूमिका भी अदा की। इसी रामलीला में लक्ष्मण का पात्र निभाने वाले राज तिवारी बताते हैं कि पॉमेला ने उन्हें कैलीफोर्निया बुलाया था। वहां उन्होंने पॉमेला को भगवान राम के बारे में लोगों को बताते सुना। बताया कि रामायण और राम को लेकर उनके द्वारा दिए गए एक लेक्चर में वह भी मौजूद थे। बीते वर्ष उन्होंने रामलीला को लेकर एक जर्नल भी प्रकाशित किया था, जिसका संपादन खुद पॉमेला ने ही किया था।

राम पर लिख रहीं किताब

पामेला से अक्सर बात करने वाले राज तिवारी बताते हैं कि वह भगवान राम को लेकर एक किताब भी लिख रही हैं, जो लगभग तैयार हो चुकी हैं। इसमें भगवान राम के जीवन के बारे में उल्लेख किया गया है। इसके अलावा भारत में रामायण और उसके जरिए की जाने वाली रामलीला का भी इस किताब में वर्णन किया गया है।

हिंदी ऐसी कि सब प्रभावित

रामलीला में केवट की पत्नी का किरदार निभाने के दौरान कई लोग उनके नजदीक आ गए थे। पूर्व पार्षद आलोक तायल बताते हैं कि उनकी हिंदी काफी अच्छी है। वह जब रामलीला के दौरान मंचन करतीं थी तो उनकी हिंदी ऐसी थी कि कोई भी यह नहीं जान पाता था कि विदेशी महिला यह संवाद बोल रही है।

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