Women Empowerment : महिलाओं को न्याय दिला रही शाहजहांपुर की 17 बेटियां, कर रही मदद, दिखा रही आइना

Women Empowerment जगत जननी के सप्तम मां कालरात्रि स्वरूप को पालनकर्ता दृढ़ता और न्याय की प्रतिमूर्ति माना जाता है। आदि शक्ति के इस स्वरूप को जनपद की 17 महिलाएं आत्मसात कर जी रही है। वह महिलाओं को न्याय दिला रही है।

Ravi MishraWed, 13 Oct 2021 05:42 PM (IST)
Women Empowerment : महिलाओं को न्याय दिला रही शाहजहांपुर की 17 बेटियां

बरेली, नरेंद्र यादव। Women Empowerment: जगत जननी के सप्तम मां कालरात्रि स्वरूप को पालनकर्ता, दृढ़ता और न्याय की प्रतिमूर्ति माना जाता है। आदि शक्ति के इस स्वरूप को जनपद की 17 महिलाएं आत्मसात कर जी रही है। इनमें 14 महिलाएं न्यायधीश के रूप में पीड़ितों को न्याय अपराधियों को सजा दे रही है। तीन अभियोजक अधिकारी के रूप में पीड़ितों की पैरवी कर उन्हें न्याय दिला रही है। इनमें नीरा रानी व सरिता देवी ने शिक्षक की नौकरी छोड़ अभियोजन सेवा का क्षेत्र चुना।

नौ साल रहीं शिक्षक अब कानून की मददगार

लखनऊ के इंदिरा नगर निवासी सेवा निवृत्त अपर जिला जज आरएन व स्व. गीता की बेटी नीरा रानी एमएससी, एलएलबी, बीएड के बाद बेसिक शिक्षा परिषद में शिक्षक बन गई। लेकिन उन्होंने पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए अभियोजक अधिकारी बनने का संकल्प लिया। दृढ़ इच्छा शक्ति व मेहनत से वह राज्य अभियोजन सेवा मेें चयनित हो गई। तीन साल से वह जनपद में अभियोजक अधिकारी के रूप में कार्यरत है। नीरा रानी कहती है पैरवी से पीड़ितों को न्याय दिलाने में जो संतुष्टि मिलती उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

दहेज के लिए बहन की हत्या देख निशा बनी एपीओ 

शाहजहांपुर में ही अभियोजक अधिकारी के रूप में कार्यरत निशा गुप्ता ने पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए अभियोजन सेवा को चुना। बदायूं जिले के अलापुर में जन्मी निशा के पिता रमेश चंद्र गुप्ता व मां सुशीला गुप्ता शिक्षक बनाना चाहते थे। लेकिन दहेज के लिए चचेरी बहन की हत्या की घटना ने निशा गुप्ता की सोच बदल दी।

स्नातक के बाद वह इलाहाबाद चली गई। वहां उन्होंने तैयारी की। भाई सचिन गुप्ता ने ढाल बनकर साथ दिया। एपीओ बनी निशा का आदि शक्ति ने भी साथ दिया। उनकी न्याय परिवार में शादी हो गई। खास बात यह है कि निशा गुप्ता के अभियोजक अधिकारी बनने के बाद क्षेत्री की तमाम बेटियां अभियोजन के सिविल सेवा के लिए सक्रिय हुई। कई अधिवक्ता भी बन गई है। निशा कहती है कि कोर्ट में आने वाली महिलाओं समेत पीड़ितों को पैरवी से जब न्याय मिलता तो बेहद खुशी मिलती है। निशा कहती है कि परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हो, ईमानदारी के साथ मेहनत करने से मुकाम जरूर मिल जाता है।

न्यायधीश बन यह महिलाएं कर रही न्याय

शाहजहांंपुर जनपद में 14 महिला जज है। जो भगवती के सप्तम कालरात्रि स्वरूप में अपराधियों को सजा देकर कानून व्यवस्था को प्रभावी बना रही है। इनमें अपर जिला जज के रूप मेें रश्मि नंदा, प्रीती सिंह कार्यरत है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में आभा पाल सेवा दे रही है।

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) के रूप में आरती द्विवेदी, आसमा सुल्ताना तथा सिविल जज जूनियर डिवीजन मीनल चावला, नितिशा चौधरी, गीतिका सिंह, अरुणांजलि सिंह, शिवानी सिंह, भावना, संगीता, नूतन गौतम न्याय की प्रतिमूर्ति बनी हुई है।

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