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बरेली में रामगंगा नदी के किनारे पानी पीते देखी गई बाघिन लेकिन वन विभाग के ड्रोन कैमरेे में नहीं हुई कैद

ग्रामीणों को समूह में लाठी-डंडा लेकर निकलने की दी सलाह।

मीरगंज के रामगंगा खादर में दो किसानों पर हमला कर घायल करने वाली बाघिन के पगमार्क के अलावा वन विभाग के हाथ पूरी तरह से खाली है। लोकेशन ट्रेस व उसकी उपस्थिति का पता लगाने के लिए ड्रोन कैमरों की भी मदद सोमवार को ली गई लेकिन सफलता नहीं मिली।

Samanvay PandeyTue, 18 May 2021 09:52 AM (IST)

बरेली, जेएनएन। मीरगंज के रामगंगा खादर में दो किसानों पर हमला कर घायल करने वाली बाघिन के पगमार्क के अलावा वन विभाग के हाथ पूरी तरह से खाली है। लोकेशन ट्रेस व उसकी उपस्थिति का पता लगाने के लिए ड्रोन कैमरों की भी मदद सोमवार को ली गई, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। मंडलीय अधिकारियों की उपस्थिति में कांबिंग की गई। जिसके बाद घटनास्थल पर बाघिन को पकड़ने के लिए एक पिंजरा लगा ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई। वहीं सोमवार को कुछ ग्रामीणों ने बाघिन को रामगंगा किनारे पानी पीते देखा। वन विभाग की टीम को मौके पर पगचिन्ह भी मिलें।

गांव गोरा हेमराजपुर में रामगंगा खादर में रविवार दोपहर गन्ने की फसल में पानी लगा रहे किसान धर्मपाल और चन्द्र पाल पर फतेहगंज पश्चिमी की बंद रबर फैक्ट्री में घूम रही बाघिन ने हमला कर लहूलुहान कर दिया था। मामले की जानकारी पर डीएफओ भारत लाल ने चार टीमें लगा बाघिन को पकड़ने के निर्देश दिए। सोमवार को सभी टीमें जहां कांबिंग करती रहीं, वहीं कंजरवेटर जावेद अख्तर भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। कंजरवेटर के निर्देश पर घटनास्थल पर पिंजरा लगाया गया। इस दौरान पुलिस क्षेत्राधिकारी सुनील कुमार राय और थाना प्रभारी दया शंकर मय फोर्स के मौजूद रहें।

पिंजरे में बांधा गया पड्डा : मीरगंज वन विभाग के रेंजर संतोष कुमार ने बताया कि बाघिन को पिंजरे तक लाने के लिए उसमें एक जिंदा पड्डा बांधा गया है। लोकेशन ट्रेस करने के लिए ड्रोन कैमरे की सहायता ली जा रही है। जरूरत पड़ी तो सेंसर कैमरें भी लगाए जाएंगे।

14 माह से रबर फैक्ट्री में घूम रही है बाघिन : फतेहगंज पश्चिमी की बंद रबर फैक्ट्री में घूम रही बाघिन 11 मार्च 2020 को पहली बार देखी गई थी। जिसे पकड़ने के लिए पांच बार ऑपरेशन टाइगर शुरू किया गया। जिसमें वन विभाग की टीम को हर बार असफलता ही हाथ लगी। बाघिन को पकड़ने के लिए विभाग अब तक 50 लाख से अधिक रुपये भी खर्च कर चुका है।

शिकार मार खाने के लिए बैठी थी बाघिन:वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक घटनास्थल पर बाघिन के पगमार्क मिले हैं। घटनास्थल के पास नरकुल की झाड़ियों में ही बाघिन ने अपना ठिकाना बना रखा था। जिसमें बाघिन ने जंगली जानवर को मारकर खाने के लिए रखा था। जिसकी जानकारी होने पर दोनों घायलों ने झाड़ियों में आग लगा हल्ला मचाना शुरू कर दिया। जहां स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए बाघिन ने किसानों पर हमला किया।

फोटो देख घायल बोले इसी ने किया हमला :घायल किसानों को सोमवार को प्राथमिक उपचार कराने के बाद बाघिन की फोटो दिखाई गई। जिस पर दोनों घायलों ने उसी बाघिन के द्वारा ही हमला किए जाने के पुष्टि की गई।

नाले-नाले होकर नदी के बीहड़ पहुंची बाघिन : वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रबर फैक्ट्री से निकलकर बाघिन नाले-नाले होकर रामगंगा नदी के बीहड़ तक पहुंची। जिसके पगचिन्ह भी मिले हैं। अधिकारियों के मुताबिक इस बीहड़ में चीतल, नीलगाय, खरगोश समेत काफी जंगली जानवर हैं। घटनास्थल से डेढ़ किलोमीटर दूरी पर गांव हैं। रबर फैक्ट्री छोड़कर बाघिन पहले भी यहां कई बार आती-जाती थी। वन विभाग की टीम को इसकी जानकारी थी।

टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञ पहुंचेंगे : घटनास्थल पर पीलीभीत टाइगर रिजर्व के वन्य जीव विशेषज्ञ व डॉक्टर मंगलवार को पहुंचेंगे। जहां खुले में अगर बाघिन की कोई लोकेशन मिलती है तो उसे ट्रेंक्युलाइज भी किया जाएगा।कंजरवेटर जावेद अख्तर ने बताया कि किसानों पर रबर फैक्ट्री में घूम रही बाघिन ने हमला किया है। मिल पगचिन्ह से इसकी पुष्टि हुई है। मंगलवार को विशेषज्ञों के पहुंचने के बाद उसे पकड़ा जाएगा। अभी फिलहाल पिंजरा लगा लोगों को सचेत कर वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी लगातार कांबिंग कर रहे हैं। 

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