जेनरिक स्टोर्स से गायब हुई ये दवा अब पचास में बिक रही पांच रुपए में मिलने वाली गोली

जेनरिक स्टोर्स से दवा गायब होने के मामले में फाइल फोटो
Publish Date:Tue, 22 Sep 2020 09:13 AM (IST) Author: Ravi Mishra

बरेली जेएनएन। कोरोना संक्रमण से बचाव में कारगर बताई गई आइवरमेक्टीन की जिले में उपलब्धता पर्याप्त है। इसे ब्लैक में तो नहीं बेचा जा रहा, लेकिन दवा के दाम में काफी अंतर आ गया है। बताते हैं कि 25 रुपये की जगह एक गोली 50 रुपये तक में बेची जा रही है। इसके बडी वजह है कि जिले में जेनरिक आइवरमेक्टीन नहीं है। कंपनियों की ओर से सप्लाई की जा रही एथिकल दवा पहले से ही मंहगी होती है, वहीं इसकी आपूर्ति बढ़ने के चलते व्यापारियों ने भी इसे मंहगा कर दिया है।

आमतौर पर पेट के कीड़े मारने के काम आने वाली आइवरमेक्टीन दवा की मांग इन दिनों खूब हो रही है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए इसे मान्यता मिलने के बाद से चिकित्सकों की सलाह पर इसका इस्तेमाल खूब हो रहा है। वहीं जागरूक लोग भी संक्रमण से बचने के लिए इसे खरीद रहे हैं। यही कारण है कि बीते दो माह में ही इसकी बिक्री में दस गुना तक का उछाल आया। जिस दवा को व्यापारी रखने से बचते थे उसकी डिमांड अब पूरी नहीं कर पा रहे हैं। बताते हैं कि शुरुआती दिनों में ही जेनरिक आइवरमेक्टीन सभी बिक गई थी। इसके बाद से प्राइवेट कंपिनयों की ओर से इसकी एथिकल टेबलेट को बाजार में लाया गया।

इस दवा की कीमत भी जेनरिक से दस गुनी ज्यादा है। जहां जेनरिक आइवर मेक्टीन की एक गोली पांच रुपये की मिलती है वहीं एथिकल दवा 50 रुपये की बिक रही है। जबकि थोक बाजार में 85 रुपये प्रिंट रेट दो गोली मिल रही हैं।दवा के थोक व्यापारी सतीश सेठी ने बताया कि आइवरमेक्टीन की मांग पहले से बहुत बढ़ गई है। जेनरिक दवा न होने से दिक्कत आ रही थी, लेकिन अब इसकी आपूर्ति भी धीरे धीरे आने लगी है। लेकिन आमजन एथलिक दवा पर ही ज्यादा विश्वास जता रहे हैं।

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