काेराेना टेस्टिंग में केजीएमयू से आगे निकला शाहजहांपुर मेडिकल काॅलेज, अब तक कर चुका 16 हजार 658 की जांच, जानिए कितने मिले संक्रमित

काेराेना टेस्टिंग में केजीएमयू से आगे निकला शाहजहांपुर मेडिकल काॅलेज

कोरोना मरीजों की संख्या जहां कम हो रही है। वहीं जिले में इसकी की जांच तेजी से बढ़ी हैं। ट्रूनेट जांच में राजकीय मेडिकल कालेज ने लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल विश्वविद्यालय को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि यहां पर संक्रमित भी ज्यादा निकले हैं।

Ravi MishraSat, 15 May 2021 06:40 PM (IST)

बरेली, जेएनएन। कोरोना मरीजों की संख्या जहां कम हो रही है। वहीं जिले में इसकी की जांच तेजी से बढ़ी हैं। ट्रूनेट जांच में राजकीय मेडिकल कालेज ने लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल विश्वविद्यालय को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि यहां पर संक्रमित भी ज्यादा निकले हैं।

कोरोना संक्रमित की जांच के लिए एंटीजन व आरटीपीसीआर जांच होती है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इस तरह की प्रतिदिन औसतन तीन से साढ़े तीन हजार जांच हो रही हैं। जबकि मेडिकल कालेज में भर्ती होने वाले मरीजों की कोविड रिपोर्ट न होने पर उनकी जांच कराई जाती है। तब तक उनको होल्डिंग एरिया में रखा जाता है।

रिपोर्ट के आधार पर मरीज को आइसोलेशन या अन्य वार्ड में भेजा जाता है। राजकीय मेडिकल कालेज में मरीजों के लिए ट्रूनेट मशीन से जांच की व्यवस्था की गई है। जिससे सात से आठ घंटे में रिपोर्ट आ जाती है। यहां ड्यूटी करने वाले स्टाफ व अन्य कर्मचारियों की जांच भी इस मशीन से होती है।

प्रदेश में दूसरा स्थान

राजकीय मेडिकल कालेज ने अब तक 16 हजार 658 जांच की हैं। जो प्रदेश के 27 राजकीय मेडिकल कालेज में दूसरे स्थान पर है। पहले स्थान पर लखनऊ का आरएमएलआइएस मेडिकल कालेज है जहां 33 हजार 34 जांच हुई हैं। जबकि केजीएमयू 16 हजार 417 जांच के साथ तीसरे स्थान पर है। बदायूं मेडिकल कालेज में एक हजार तीन जांच हुई हैं।

जांच में मिले सबसे ज्यादा संक्रमित

राजकीय मेडिकल कालेज में हुईं जांच में अब तक 2401 संक्रमित मिले हैं। जबकि आरएमएलआइएस मेडिकल कालेज की जांच में 2157 पॉजिटिव पाए गए हैं। केजीएमयू में यह संख्या 1153 तथा बदायूं में 276 है।

फैक्ट फाइल 

- 243075- आरटीपीसीआर

- 398485- एंटीजन

- 16658- ट्रूनेट

राजकीय मेडिकल कालेज ट्रूनेट में अपनी अधिकतम क्षमता से कार्य कर रहा है। महामारी के इस समय में सबसे सटीक परिणाम देकर कोविड उन्मूलन में सबसे आगे है। माइक्रोबायलॉजी विभाग की डा. श्वेता सिंह, डा. मनीष दिवाकर व उनकी टीम ने बेहतर काम किया है। अभय सिन्हा, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कालेज

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