रुहेलखंड के शोधार्थी ने किया शोध, बोला- अब सिम की तरह होंगी मोबाइल फोन की बैटरियां

रुहेलखंड के शोधार्थी ने किया शोध, बोला- अब सिम की तरह होंगी मोबाइल फोन की बैटरियां

क्या आपने कभी सोचा है अगर मोबाइल और लैपटाप की बैटरी एक सिम कार्ड जैसी हो जाए तो। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड यूनिवर्सिटी (रुविवि बरेली) में एप्लाइड फिजिक्स के डा. दुर्गेश कुमार शर्मा ने इस पर शोध किया है।

Ravi MishraSun, 28 Feb 2021 10:42 AM (IST)

बरेली, दीपेंद्र प्रताप सिंह। : क्या आपने कभी सोचा है अगर मोबाइल और लैपटाप की बैटरी एक सिम कार्ड जैसी हो जाए तो। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड यूनिवर्सिटी (रुविवि, बरेली) में एप्लाइड फिजिक्स के डा. दुर्गेश कुमार शर्मा ने इस पर शोध किया है। उनके अनुसार अभी बल्क ग्रेफिटिक कार्बन तत्व से रिचार्जेबल लीथियम आयन (ली-आन) बैटरी बनती है। यही कारण है कि इसका आकार बड़ा हो जाता है। शोध में बैटरी का आकार घटाने के लिए जर्मेनीन को लीथियम आयन रिचार्जेबल बैट्री बनाने के लिए उपयुक्त पाया गया। जर्मेनीन की चाìजग क्षमता चेक की गई तो सामने आया कि इसकी स्टेबिलिटी ग्रेफिटिक कार्बन से बेहतर थी।

जर्मेनीन द्विआयामी (2डी) तत्व है, जिससे बल्क जर्मेनियम मैटेरियल का आकार एटामिक स्केल (आणविक स्तर) तक घटाया जा सकता है। जर्मेनीन की ली-आन धारण करने की क्षमता व इलेक्ट्रानिक गतिशीलता अच्छी है। यह बैटरी को जल्द गर्म नहीं होने देगा। दुर्गेश की मानें तो जर्मेनीन को भविष्य में ली-आन बैटरियां बनाने में उपयोग कर इलेक्ट्रानिक डिवाइस का आकार काफी छोटा किया जा सकता है। यहां तक कि मोबाइल व लैपटाप की बैटरियां सिम के आकार की हो सकती हैं। हालांकि दुर्गेश के शोध पर अभी व्यावसायिक रूप से कार्य नहीं हुआ है। लेकिन उनका यह शोध एक नया रास्ता खोल सकता है।

शोध का विषय ‘स्टेबिलिटी, इलेक्ट्रॉनिक एंड आप्टिकल प्रापर्टीज आफ 2डी मैटेरियल्स : एन एब-इनिसिओ स्टडी’ था। इसमें जर्मेनियम आधारित 2डी तत्वों के यौगिकों (कंपाउंड) पर कार्य किया गया। यूनिवर्सटिी के भौतिकी विभाग में प्रो. सुधीर कुमार के मार्गदर्शन में कार्य पूरा हुआ। शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल एल्सेवियर के जर्नल कंप्यूटेशनल कंडेंस्ड मैटर में प्रकाशित हो चुका है।

क्या है ग्रेफाइट कार्बन

यह कार्बन का प्राकृतिक और स्वाभाविक रूप है। मानक परिस्थितियों में कार्बन का सबसे स्थिर रूप है। उच्च दबाव और उच्च तापमान के तहत यह हीरे में परिवíतत हो जाता है

यह है जर्मेनीन

जर्मेनीन जर्मेनियम का आधुनिक 2डी तत्व है, जो नैनो तकनीक में अहम है। वहीं जर्मेनियम एक रासायनिक तत्व है। यह कम मात्र में पाया जाता है। यह जस्ते के खनिजों के साथ मिला हुआ मिलता है। खनिजों को जलाने पर जो राख बच जाती है, उसमें 0.25 फीसदी जर्मेनियम आक्साइड रहता है। इसके आक्साइड को एल्युमिनियम, कार्बन या हाइड्रोजन द्वारा अपचयित करने से धातु प्राप्त होती है। अपचयन में आक्सीजन का निष्कासन और हाइड्रोजन का संयोग होता है।

नैनो टेक्नोलाजी पर शोध की भविष्य में अपार संभावनाएं हैं। जर्मेनियम मोबाइल बैटरी में बेहतर कर सकता है। इंटरनेशनल जर्नल एल्सेवियर के जर्नल कंप्यूटेशनल कंडेंस्ड मैटर में प्रकाशित दुर्गेश शर्मा का शोध प्रायोगिक स्तर के बाद नया रास्ता खोल सकता है। -प्रो एलपी सिंह, नैनो टेक्नोलोजी एक्सपर्ट, सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, रुड़की

2डी मैटेरियल्स की बहुत ही शानदार विशेषता रहती है। इसका इस्तेमाल कैटलिसीस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रोड्स और जल शुद्धीकरण के लिए होता है। इसके गुणों को सतह क्रियाशीलता के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है। शोध कार्य काफी दिलचस्प है, हालांकि इन परिणामों को मान्य करने के लिए प्रायोगिक अध्ययन किए जाने की आवश्यकता है। - प्रो. राजू गुप्ता, केमिकल इंजीनियरिंग विभाग, आइआइटी, कानपुर

जर्मेनियम के 2डी मैटेरियल की लीथियम आयन बैटरी में उपयोगिता पर डा. दुर्गेश ने शोध किया है। इसके परिणाम सकारात्मक मिले हैं। जिससे भविष्य में रिचार्जेबल बैटरी कई गुना हल्की और छोटी होंगी।- प्रो. सुधीर कुमार, विभागाध्यक्ष, भौतिक विज्ञान, रुविवि

 

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