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Right to freedom of Expression: जानिए रनवीर कैसे बने मूक बधिरों की आवाज

Right to freedom of Expression: जानिए रनवीर कैसे बने मूक बधिरों की आवाज
Publish Date:Mon, 10 Aug 2020 06:00 AM (IST) Author: Ravi Mishra

शाहजहांपुर, अजयवीर सिंह । अपने लिए तो सब जीते हैं, लेकिन जो दूसरों के लिए जीवन समर्पित कर दे ऐसे विरले कम ही होते हैं। ऐसे ही एक शख्स है रनवीर सिंह। शहर के घूरनतलैया मुहल्ले में रहते हैं। तमाम ऐसे लोगों की अभिव्यक्ति का माध्यम हैं जो बोल और सुन नहीं सकते। न सिर्फ शाहजहांपुर बल्कि आसपास के कई जिलों के मूक बधिरों की आवाज बनने की रनवीर की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है।

दरअसल उनके पिता ने अपने एक परिचित की बेटी रेखा से बिना पूछे उनका रिश्ता तय कर दिया था। रेखा बोल व सुन नहीं सकती थीं। पिता अपने परिचित की परेशानी कम करना चाहते थे। उनके आगे रनवीर ने कुछ नहीं कहा। शादी के कुछ समय तक तो दिक्कत हुई, लेकिन रनवीर ने जब रेखा की मदद शुरू की तो उन्हें अच्छा लगा।

उनका साला विजय भी मूक बधिर है। विजय को कोई जरूरत व काम होता तो वह उसकी मदद करते। धीरे-धीरे वह विजय के अन्य मित्रों से मिले जो उसकी तरह ही थे। अपनी बोल व न सुन पाने की कमी के कारण सामान्य जीवन नहीं जी पा रहे थे। रनवीर ने तय कर लिया कि वह ऐसे लोगों की आवाज बनेंगे।

लिया प्रशिक्षण, बनाया संगठन

उन्होंने नोएडा जाकर मूक बधिरों की बात समझने का छह माह का प्रशिक्षण लिया। भारद्वाज कालोनी निवासी मूक बधिर अमन सक्सेना के साथ मिलकर संगठन एसोसिएशन ऑफ द डीफ वेलफेयर। जिससे जिले के अलावा, पीलीभीत, बदायूं, बरेली, लखनऊ आदि जिलों के मूक बधिर जुड़े हैं। इस संगठन से जुड़े लोग मदद के लिए हाथ नहीं फैलाते। किसी की दया के पात्र नहीं बनते बल्कि अपने अधिकारों के प्रति सजग रहते हैं। कोई नौकरी कर रहा है तो कोई बिजनेस। कभी दिक्कत होती है तो स्वयं अधिकारियों के पास जाते हैं। अपनी बात रखते हैं। रनवीर बस इनकी आवाज बनकर साथ होते हैं। इस कार्य के लिए 2019 में उन्हें एक स्थानीय संस्था ने अटल रत्न सम्मान भी मिला।

जिले में कराए राज्य स्तरीय खेल

रनवीर ने जिले में राज्यस्तरीय प्रतियोगिताएं भी शुरू कराई हैं। ताकि मूक बधिर भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खेलों में अपनी प्रतिभा दिखा सकें। बैडमिंटन, टेबिल टेनिस, फुटबाल, वॉलीबाल की प्रैक्टिस होती है।

बनवाए ड्राइविंग लाइसेंस

मूक बधिरों ने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए पूरे देश में आंदोलन किए। उप्र में रनवीर ने आवाज उठाई। दो साल पहले जिले में मूक बधिरों के ड्राइविंग लाइसेंस बनने की शुरू हुई। पांच मूक बधिरों को प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण दिलाकर रोजगार भी दिलाया।

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