नाइट कर्फ्यू में फैक्ट्री कर्मचारियों को पास दिखाकर निकलने की होगी इजाजत, फैक्ट्री मालिकों को सता रही एक शिफ्ट प्रभावित होने की चिंता

जिले में दोनों शिफ्ट में काम करने वाली करीब 120 इकाइयां प्रभावित होने की आशंका

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला प्रशासन ने शुक्रवार से रात्रि कर्फ्यू लगाया गया है। रात्रि कर्फ्यू लगाए जाने के बाद उद्यमियों और फैक्ट्री संचालकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि जिला प्रशासन द्वारा फैक्ट्रियों के कार्मिकों को पास दिखाने पर आवागमन की छूट दी गई है।

Samanvay PandeyFri, 09 Apr 2021 11:50 AM (IST)

बरेली : कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला प्रशासन ने शुक्रवार से रात्रि कर्फ्यू लगाया गया है। रात्रि कर्फ्यू लगाए जाने के बाद उद्यमियों और फैक्ट्री संचालकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि जिला प्रशासन द्वारा फैक्ट्रियों के कार्मिकों को पास दिखाने पर आवागमन करने की छूट दी गई है। इसके बाद भी उद्यमियों का मानना है कि रात्रि शिफ्ट में फैक्ट्री संचालन प्रभावित होगा।

उद्यमियों का कहना है कि कर्फ्यू के नाम से ही कर्मचारी घबरा जाते हैं। वह रात में आने से मना कर देते हैं। ऐसे में कर्मचारियों को समझाना पड़ता है, इसके बाद वह काम पर आते हैं। उद्यमी बताते हैं कि इस समय पहले से ही गेहूं कटाई का काम चल रहा है, इसके चलते पहले से ही लेबर कम आ रही है। अब रात्रि कर्फ्यू से परेशानी और बढ़ सकती है। जिले में तकरीबन 120 ऐसी इकाइयां है जो रात्रि में भी संचालित होती हैं। वहीं उद्यमी विनीत अग्रवाल ने बताया कि रात्रि कर्फ्यू से दिक्कत तो आएगी ही। रिटेल बाजार काफी प्रभावित होगा। हालांकि प्रशासन ने फैक्ट्री कर्मियों को आगवामन में छूट देकर राहत दी है। बताया कि रात्रि कर्फ्यू से लोगों पर मनोवैज्ञानिक दबाव पड़ता है। संक्रमण रोकने का यह उचित तरीका है।

उद्यमियों की बात

- रात्रि कर्फ्यू से काफी फर्क पड़ेगा। एक शिफ्ट लगभग बंद सी हो जाएगी। प्रशासन ने छूट दी है, लेकिन कर्मचारी इसे नहीं समझते। प्रोडक्शन पर भी असर पडे़गा। हालांकि संक्रमण रोकने के लिए हम सभी एहतियात के साथ प्रशासन के साथ हैं। - पियूष अग्रवाल, अध्यक्ष आइआइए

- रात्रि कर्फ्यू लगे लेकिन ट्रांसपोर्टेशन न रोका जाए। अगर ऐसा रहेगा तो ठीक है। संक्रमण को रोकने में हम सभी भी सहयोग करेंगे। प्रोडक्शन में 10 से 15 फीसद तक इफेक्ट पड़ेगा। - सुरेश सुंदरानी, उद्यमी

- कई फैक्ट्रियां 24 घंटे संचालित होती है। किसी में 12-12 घंटे की दो तो किसी में 8-8 घंटे की तीन शिफ्ट चलती है। ऐसे में कर्मियों के आवागमन में दिक्कत होगी। प्रशासन से छूट मिली है, लेकिन कर्मियों में डर रहता है। दीपांशू अग्रवाल, उद्यमी

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