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रास्ता क्यों रोका, कॉलोनियों के बंद गेट खुलवाइए

बरेली, जेएनएन : पॉश कॉलोनियों में आम लोगों का रास्ता बंद कर गेट लगा दिए गए। कौन वहां से गुजर सकेगा और कौन नहीं, यह वहां के गार्ड पर निर्भर कर दिया गया। राहगीरों का रास्ता बंद होने का एक मामला जिले के नोडल अधिकारी नवनीत सहगल तक पहुंच गया। उन्होंने भी माना कि गेट लगवाकर किसी का रास्ता बंद करना गलत है। जिला प्रशासन से कहा कि इन्हें खुलवाइए।

मॉडल टाउन में ई-ब्लॉक कॉलोनी के गेट का विवाद पहले से चला आ रहा था। उसे खुलवाने की मांग को लेकर डॉ. दिवाकर चौबे शनिवार को सर्किट हाउस में नोडल अधिकारी नवनीत सहगल से मिलने पहुंचे। उन्हें पूरा प्रकरण समझाया, नियमानुसार सार्वजनिक रास्ते को बंद नहीं किया जा सकता है। यह नोडल अधिकारी ने भी माना। उन्होंने डीएम नितीश कुमार से कहा कि बंद गेट खुलना चाहिए। बातचीत के दौरान शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार और बिथरीचैनपुर के विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल भी मौजूद थे।

यह है मामला

कुछ महीने पहले कोरोना संक्रमण से बचाव की बात कहकर इस गेट को बंद किया गया था। तब कॉलोनी के दूसरे गेट भी बंद कराए गए थे। बाद में बाकी गेट तो खोल दिए गए हैं, लेकिन ई-ब्लॉक वाले गेट को अभी तक नहीं खोला गया है। गेट के करीब रहने वाले डॉ. दिवाकर चौबे समेत कई लोगों ने इस मामले में सीएम पोर्टल पर शिकायत की है। इसकी जांच बारादरी थाने की दारोगा अनुराधा वर्मा को सौंपी गई है। डॉ. दिवाकर चौबे का कहना है कि नगर निगम के अधिकार क्षेत्र वाला गेट बंद करने के पीछे असल मंशा कॉलोनी की सड़क का पार्किंग के रूप में इस्तेमाल करने की है। इसी गली में रहने वाले भाजपा नेता पर भी गेट बंद करवाने का आरोप लगाया।

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मॉडल टाउन में गेट लगाए जाने पर आपत्ति आई है। प्रकरण की जांच एडीएम सिटी को दी है। जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की जाएगी।

-नितीश कुमार, डीएम

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अन्य स्थानों पर भी लगे गेट, अधिवक्ता परिषद विरोध में

अधिवक्ता परिषद ने भी शुक्रवार को जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर कहा था कि कई कॉलोनियों में गेट लगवाकर रास्ते बंद कर दिए गए। इन्हें खुलवाया जाए। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र पांडेय ने बताया कि आम आदमी के लिए रास्ते बंद किए जा रहे इसलिए हमने ज्ञापन भेजा था। यदि गेट नहीं खुलते हैं तो अगला कदम उठाएंगे।

गेट लगाना गैरकानूनी, पुलिस भी कर सकती है कार्रवाई

नगर निगम कह चुका है कि बिना अनुमति गेट लगाना अतिक्रमण है। हालांकि कार्रवाई की बात प्रशासन के जिम्मे डाल दी। जागर संस्था के डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि सार्वजनिक रास्तों को कानूनी तौर पर बंद नहीं किया जा सकता है। जिन रास्तों पर नगर निगम ने पैसा खर्च करके सड़क बनवाई है, स्ट्रीट लाइट लगवाई है, उन रास्तों को सार्वजनिक उपयोग के लिए हर हाल में खोलना पड़ेगा। इसके लिए पुलिस को भी अधिकार है कि वह अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें। 133 सीआरपीसी में इसका प्रावधान है कि पब्लिक इस्तेमाल के रास्तों को बंद किया जाना गैर कानूनी है।

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बिना अनुमति किसी भी कॉलोनी या रास्ते में गेट नहीं लगवाए जा सकते हैं। आम रास्ते पर किसी की आवाजाही नहीं रोकी जा सकती। गेट लगने की शिकायत पर जिला प्रशासन उसे हटाने का आदेश दे सकता है।

-संजय सिंह चौहान, मुख्य अभियंता, नगर निगम

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