Mukul Encounter 2007 : मुकुल एनकाउंटर से जुडे़ गुप्ता दंपती हत्याकांड के तार, सीबीआइ ने किया इशारा, बरेली में भी हो रही जांच

Mukul Encounter 2007 बदायूं वर्ष 2007 में एमआर बेटे मुकुल के फर्जी एनकाउंटर की पिता पैरवी कर रहे थे। हाइकोर्ट से सीबीाआइ जांच के आदेश करवा लिए थे। जांच पूरी होने से पहले ही 2015 में बदायूं स्थित उनके माता पिता की घर में हत्या कर दी जाती है।

Ravi MishraThu, 16 Sep 2021 01:54 PM (IST)
Mukul Encounter 2007 : मुकुल एनकाउंटर से जुडे़ गुप्ता दंपती हत्याकांड के तार

बरेली, जेएनएन। Mukul Encounter 2007 : बदायूं वर्ष 2007 में एमआर बेटे मुकुल के फर्जी एनकाउंटर की पिता पैरवी कर रहे थे। हाइकोर्ट से सीबीाआइ जांच के आदेश करवा लिए थे। जांच पूरी होने से पहले ही 2015 में मुकुल के माता पिता की भी बदायूं स्थित उनके घर में हत्या कर दी जाती है। इस मामले की जांच भी सीबीआई कर रही है। सीबीआई को अब इस मामले में ठोस सुबूत हाथ लगे हैं। कातिल घर के सामने रहने वाला उदय प्रकाश शर्मा था, जिसने 2019 में खुदकुशी कर ली थी। मामला साफ होते ही अब एक फिर से गुप्ता दंपती हत्याकांड के तार मुकुल के फर्जी एनकाउंटर से जोड़ कर देखे जाने लगे हैं।

आइपीएस समेत 11 पुलिस कर्मियों पर दर्ज मुकदमा

जून 2007 में फतेहगंज पश्चिमी के रेलवे फाटक के पास मुकुल गुप्ता का एनकाउंटर हुआ था। इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए, तत्कालीन एएसपी जे रविंद्र गौड़ जो वर्तमान में डीआईजी गोरखपुर हैं, उनके समेत 11 पुलिस कर्मी तत्कालीन एसआई देवेंद्र कुमार, विकास सक्सेना, मूला सिंह, राकेश कुमार और कांस्बेबल गौरीशंकर, जगवीर सिंह, बृजेंद्र शर्मा, अनिल शर्मा और कालीचरण के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। हाईकोर्ट के अदेश के बाद इस मामले में सीबीआई जांच कर रही है।

कम शब्दों में काफी कुछ कहा

गुप्ता दंपती हत्याकांड की जांच करने बदायूं पहुंची सीबीआइ टीम के एक बड़े अधिकारी ने कहा कि इस मामले के राजफाश के करीब पहुंच गए हैं। इस मामले से जुड़ी एक जांच बरेली में भी चल रही है। इशारों में शायद वह कहना चाह रहे थे कि विजेंद्र कुमार गुप्ता और उनकी पत्नी शन्नो गुप्ता की हत्या से जुड़ी उनके बेटे मुकुल गुप्ता के फर्जी एनकाउंटर मामले की जांच चल रही है। क्योंकि इसके अलावा कोई दूसरा केस बरेली में इससे जुड़ा नहीं है।

शहर में शुरू हुई चर्चा

उदय प्रकाश शर्मा के घर से सामान जब्त करने के बाद सीबीआइ टीम चली गई। इसके बाद से ही शहर में चर्चा शुरू हो गई कि विजेंद्र गुप्ता अपने बेटे के फर्जी एनकाउंटर की पैरवी कर रहे थे, इसकी वजह से ही उनकी हत्या की गई। लोगों का कहना था कि गुप्ता दंपती की हत्या के बाद लूट, चोरी जैसी कोई बड़ी बात सामने नहीं आई थी।

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