उच्च शिक्षा राज्यमंत्री नीलिमा क‍टियार बोली, पिछली सरकारों के घाव भरकर बदलेंगे उच्च शिक्षा की तस्वीर Bareilly News

जेएनएन, बरेली : छात्रों के स्कॉलरशिप का मुद्दा हो या सेल्फ फाइनेंस शिक्षकों की समस्याएं। यह सब जल्द दूर होंगी। पुरानी सरकारों ने जो घाव दिए थे उसे भरकर प्रदेश में उच्च शिक्षा की नई तस्वीर तैयार की जाएगी। सोमवार को शहर आईं प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्यमंत्री नीलिमा कटियार ने जागरण संवाद में शिरकत कर यह बातें कहीं। दैनिक जागरण कार्यालय में हुए संवाद में शहर के तमाम शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों, शिक्षकों के सवालों का तसल्ली से जवाब दिया। साथ ही, बदलती उच्च शिक्षा की रूपरेखा पेश की।

सवालों के साथ दिए सुझाव 

1. एकेटीयू से संबद्ध कॉलेजों में उन्हीं छात्रों को स्कॉलरशिप दिया जा रहा जो काउंसलिंग से आए। बाकी गरीब छात्र परेशान हैं, उनके लिए सरकार क्या कर रही?

अनुपम कपूर, चेयरमैन, सिद्धि विनायक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस

2. दाखिले के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में काफी दिक्कतें आ रहीं हैं। छात्र एडमिशन नहीं ले पा रहे?

प्रेम प्रकाश अग्रवाल, चेयरमैन, महाराजा अग्रसेन कॉलेज

3. एडेड कॉलेजों में स्थायी प्राचार्य नहीं हैं। शासन के स्पष्ट निर्देश के बावजूद कुछ कॉलेजों की परीक्षाएं स्वकेंद्र कराई जा रहीं हैं।

डॉ. वंदना शर्मा, चीफ प्रॉक्टर, बरेली कॉलेज

4. बच्चे कॉलेज पढ़ने नहीं आते। कोई सटीक तरीका भी नहीं है कि उन्हें बाध्य किया जा सके। इसे कैसे दूर किया जाएगा?

डॉ. चारु मेहरोत्र, शिक्षक, बरेली कॉलेज

5. सेल्फ फाइनेंस के शिक्षकों के साथ भेदभाव होता है। समितियों में नहीं रखे जाते। रिसर्च नहीं करा पाते।

डॉ. योगेश शर्मा, शिक्षक, बरेली कॉलेज

6. कॉलेजों में रेमिडियल क्लासेज को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इससे छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार हो सकेंगे।

डॉ. केबी त्रिपाठी, निदेशक, श्रेष्ठ आइएएस कोचिंग संस्थान

7. प्राइवेट कॉलेजों में भी प्रशासनिक भूमिका बढ़ाई जानी चाहिए। इससे शिक्षा के स्तर में सुधार होगा।

- डॉ. वाईडीएस आर्या, कुलपति, इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी

8. सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में परीक्षा शुल्क कम हो। इसके चलते बच्चे शिक्षा हासिल नहीं कर पा रहे।

मुकेश गुप्ता, चेयरमैन, फ्यूचर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस                                                                

9. विश्वविद्यालय का पाठ्यक्रम काफी पुराना हो चुका है। रोजगारपरक नहीं है। - विनय खंडेलवाल, चेयरमैन, खंडेलवाल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस

सेल्फ फाइनेंस शिक्षकों को बराबरी

सेल्फ फाइनेंस शिक्षकों की समस्या पर उच्च शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस पर विचार कर रही है। इन शिक्षकों को बराबरी का अधिकार मिले, यह ङ्क्षबदु पॉलिसी में शामिल किया जाएगा। विश्वविद्यालयों में बनने वाली तमाम कमेटियों में भी सेल्फ फाइनेंस शिक्षकों की सहभागिता बढ़ाई जाएगी।

जल्द ही मिलेंगे स्थायी प्राचार्य 

एक सवाल के जवाब में कहा कि कॉलेजों में स्थायी प्राचार्यो की नियुक्ति की प्रक्रिया भी चल रही है। आयोग को ब्योरा भेजा है। अच्छा परिणाम देखने को मिलेगा। आश्वस्त किया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी को भी दूर करने के प्रयास जारी हैं। जल्द ही इसके सकारात्मक नतीजे आ जाएंगे। भर्ती प्रक्रिया को ऐसी बनाई जा रही जिससे अच्छे शिक्षकों की भर्ती हो सके।

आसान होगी दाखिले की प्रक्रिया

मंत्री ने बताया कि डिग्री कॉलेजों में स्नातक के दाखिले की प्रक्रिया सरल बनाई जाएगी। ऐसा सिस्टम बनाया जाएगा जिससे छात्र आसानी से प्रवेश ले सकें।

एजुकेशन विद एप्लीकेशन पर फोकस

एक सवाल के जवाब में राज्यमंत्री ने कहा कि सभी पाठ्यक्रमों को अपडेट किया जा रहा है। कॉमन सिलेबस तैयार हो चुके हैं। नई शिक्षा नीति में छात्रों के रोजगार और स्किल पर भी फोकस किया गया है। एजुकेशन विद एप्लीकेशन पर काम हो रहा है।

ऑनलाइन उपस्थिति पर हो विचार

कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए हाजिरी ऑनलाइन दर्ज कराने पर सरकार विचार कर रही है। जल्द ही इसका खाका तैयार करके सभी जगहों पर लागू कर दिया जाएगा।

स्कॉलरशिप की परेशानी होगी दूर

इंजीनियरिंग कॉलेजों में बगैर काउंसलिंग वाले छात्रों को स्कॉलरशिप न मिलने के सवाल पर उन्होंने प्राविधिक शिक्षा मंत्री से बात करने के लिए कहा। बोलीं, वह इस मसले को उनके सामने पेश करेंगी और समस्या का जल्द से जल्द निस्तारण कराने की कोशिश करेंगी। सामान्य डिग्री कॉलेजों, विश्वविद्यालयों का शुल्क ढांचा भी सरकार से अनुमोदित कराएंगे, ताकि छात्रों को सही स्कॉलरशिप मिल सके।

ये भी रहे मौजूद

इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार संतोष कुमार, शिक्षक एमएलसी के लिए भाजपा प्रत्याशी डॉ. हरि सिंह ढिल्लो, शिक्षक नेता आशुतोष शर्मा, आदेश प्रताप सिंह आदि।

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