Kargil Vijay Diwas 2021 : बरेली का युद्ध स्मारक सुनाता है कारगिल के वीरों की शौर्य गाथा, जाट रेजीमेंट के म्यूजियम में मौजूद है कई निशानियां

Kargil Vijay Diwas 2021 पाकिस्तान के नापाक इरादे को नेस्तोनाबूद करते हुए कारगिल विजय में भी जाट रेजीमेंट ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। महावीर चक्र विजेता कैप्टन अनुज नैय्यर 17 वीं जाट बटालियन में ही थे। जाट रेजीमेंट का वार म्यूजियम इन वीरों की गाथाएं सुनाता है।

Ravi MishraMon, 26 Jul 2021 09:33 AM (IST)
Kargil Vijay Diwas 2021 : बरेली का युद्ध स्मारक सुनाता है कारगिल के वीरों की शौर्य गाथा

बरेली, जेएनएन। Kargil Vijay Diwas 2021 : पाकिस्तान के नापाक इरादे को नेस्तोनाबूद करते हुए कारगिल विजय में भी जाट रेजीमेंट ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। महावीर चक्र विजेता कैप्टन अनुज नैय्यर 17 वीं जाट बटालियन में ही थे। जाट रेजीमेंट का वार म्यूजियम इन वीरों की गाथाएं सुनाता है। इस म्यूजियम में उन पाकिस्तानी सैनिकों के अस्त्र-शस्त्र भी रखे हैं, जिन्हें कारगिल में हमारे सैनिकों ने जब्त कर लिया था। कब्जे में है पाकिस्तान की जानलेवा मशीन गन वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान हमारे जांबाज सैनिकों ने पाकिस्तानियों से मशीन गन भी कब्जे में ली थी।

कितनी घातक है छीनी गई मशीनगन

यह कितनी घातक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि इसकी गोली करीब सात इंच की होती थी। इससे 250 राउंड तक फायर किए जाते थे। इस मशीनगन से पाकिस्तानी ऊंचाई से बने बंकर से हमला करते थे। बर्फ में छिपकर करते थे वार, फिर भी आए हाथ 10 हजार फिट की ऊंचाई पर अधिकतर हिस्सा बर्फ से ढका होता था। इसलिए युद्ध के दौरान पाकिस्तानी छिपकर वार करने के लिए स्नो ड्रेस पहनते थे। हालांकि भारतीय वीरों की निगाह से नहीं बच सके। युद्ध स्मारक में ऐसे सैनिक की वर्दी भी मौजूद है। यह ड्रेस पाकिस्तानी फोर्स के नार्दर्न लाइट इन्फेंट्री के जवान की है। इसके अलावा पाक फील्ड टेलीफोन भी म्यूजियम में रखा है।

जाट रेजीमेंट की शान हैं हवलदार कुमार

कारगिल युद्ध वीरों में शुमार हैं हवलदार कुमार सिंह। जाट रेजीमेंट सेंटर से प्रशिक्षण पाने वाले इस जवान का जन्म आगरा के फतेहपुर सीकरी में हुआ। लेकिन इन्हें देश का वीर सैनिक बनाया बरेली के जाट रेजीमेंट सेंटर ने। यहां नौ महीने तक मिलने वाली कठिन ट्रेनिंग का ही नतीजा रहा कि हवलदार कुमार सिंह ने कश्मीर के द्रास सेक्टर में मुश्कोह घाटी पर बर्फीली चट्टों के बीच शून्य डिग्री से कम तापमान पर दुश्मन से मोर्चा लिया। करीब 18 हजार फीट ऊंचाई पर 10 घंटे तक दुश्मन को रोके रखा। रात में साथियों के साथ चढ़ाई की और 16 दुश्मनों को मार भगाया। 10 घंटे तक लगातार युद्ध के बाद और ¨पपल-1 और ¨पपल-2 पर फतह पाने के लिए हवलदार कुमार सिंह ने अपनी जान तक न्योछावर कर दी।

जाट रेजीमेंट पर एक नजर

1975 में बनी थी जाट रेजीमेंट

1947 के बाद से भारतीय रेजीमेंट में बदला स्वरूप

152 साल ब्रिटिश राज में रही रेजीमेंट

23 वाहिनियां हैं जाट रेजीमेंट के अंतर्गत

 

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