बरेली के स्वास्थ्य विभाग का कांटेक्ट ट्रेसिंग के नाम में भी खेल, मनमर्जी से दर्ज किए जा रहे नाम

बरेली के स्वास्थ्य विभाग का कांटेक्ट ट्रेसिंग के नाम में भी खेल, मनमर्जी से दर्ज किए जा रहे नाम
Publish Date:Mon, 28 Sep 2020 09:04 AM (IST) Author: Ravi Mishra

बरेली, जेएनएन।  कोरोना संक्रमण को जब याद किया जाएगा तो स्वास्थ्य विभाग का नाम भी जरूर लिया जाएगा। इस दौरान उनकी लापरवाही और किए गए खेल भुलाने वाले नहीं है। अब नया खेल संक्रमित लोगों के कांटेक्ट ट्रेसिंग करने में सामने आया है। संक्रमित लोगों के कांटेक्ट में उन लोगों के नाम डाल दिए जा रहे हैं, जिन्हें वह जानते नहीं। विभाग के ही एक साहब ने पोर्टल खंगाला तो इसकी पुष्टि हुई। तब खुलासा हुआ बीते छह महीने से सुस्त चल रही कांटेक्ट ट्रेसिंग की रफ्तार अचानक कैसे तेज हो गई।कोरोना संक्रमण के केस मार्च के अंतिम माह से मिलने शुरू हो गए थे। इसके बाद धीरे धीरे इसे रोकने की प्रक्रिया शुरू हुई और अप्रैल तक सभी व्यवस्थाएं कर ली गईं। कौन संक्रमित किसके संपर्क में आया, इसे जानने के लिए कांटेक्ट ट्रेसिंग शुरू हुई। इसके लिए सर्विलांस टीम से इतर एक और टीम लगाई गई जो संक्रमितों को फोन कर उनसे संपर्क में आए लोगों की जानकारी लेती थी। जुलाई माह तक कांटेक्ट ट्रेसिंग की प्रक्रिया सामान्य चल रही थी।

हालत यह थी कि छह अगस्त तक मात्र 20 हजार लोगों को ट्रेक किया जा सका था। वहीं इस डेढ़ महीने में कुल 101721 लोगों को ट्रेक किया गया। मतलब छह महीने में मात्र 20 हजार और डेढ़ महीने में 80 हजार से ज्यादा लोग ट्रेक किए गए। यह आंकड़ा भी कांटेक्ट ट्रेसिंग में हुए खेल की ओर इशारा कर रहा है। आमजन अनजान इसलिए आसानी से हो जाता खेल संक्रमित व्यक्ति के पास फोन कर जानकारी ली जाती है कि उनके संपर्क में कोई आया कि नहीं। नियमत: संबंधित व्यक्ति की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार ही उनके संपर्क में आए लोगों को पता चलता है। लेकिन टारगेट पूरा करने के लिए संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों के फर्जी नाम भी चढ़ा दिए जा रहे हैं। यह इसलिए हो पा रहा है क्योंकि संबंधित संक्रमित व्यक्ति को तो पता ही नहीं होता कि उसकी फाइल हिस्ट्री में लिखा क्या क्या गया।

सिविल लाइंस निवासी युवक छह सितंबर को संक्रमित आया। इसके बाद से वह कोविड अस्पताल में आइसोलेट हो गया। युवक की तबीयत ठीक न होने के चलते वह अभी खुद को आइसोलेट ही किए हैं। शनिवार को जब उसके एक परिचित उसकी दूसरी रिपोर्ट जानने पहुंचे तो विभागीय व्यक्ति ने पोर्टल दिखाया। जिसमें कांटेक्ट ट्रेवर्लस कॉलम में दो महिलाओं के नाम दर्ज थे। यह देख वह चौक गया। जानकारी करने पर पता चला कि वह फर्जी हैं।

सुभाष नगर में रहने वाले एक युवक खुद, उसकी पत्नी और दो बच्चे पॉजिटिव आ गए। इसके बाद युवक की पत्नी ओर बच्चे स्वस्थ हो गए लेकिन उसकी दूसरी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। युवक को संशय होने पर उसने अपने एक परिचित को भेज कर रिपोर्ट का प्रिंट निकलवाने को कहा। जब प्रिंटआउट देखा तो उसमें भी चार नाम कांटेक्ट ट्रेवलर्स वाले कॉलम में दर्ज थे, जिन्हें वह जानता तक नहीं था।

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