शाहजहांपुर में बोले बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय, अध्यात्म से बदल सकता है पुलिस का आचरण

Former Bihar DGP Gupteshwar Pandey in Shahjahanpur शाहजहांपुर में सेवानिवृत्ति के बाद तमाम नौकरशाह राजनीतिक में आए। कइयों को सफलता मिली। कुछ नाकाम होकर गुमनामी में चले गए लेकिन बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने अध्यात्म की राह पकड़ी।

Ravi MishraFri, 26 Nov 2021 06:47 PM (IST)
शाहजहांपुर में बोले बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय, अध्यात्म से बदल सकता है पुलिस का आचरण

बरेली, जेएनएन। Former Bihar DGP Gupteshwar Pandey in Shahjahanpur : शाहजहांपुर में सेवानिवृत्ति के बाद तमाम नौकरशाह राजनीतिक में आए। कइयों को सफलता मिली। कुछ नाकाम होकर गुमनामी में चले गए, लेकिन बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने अध्यात्म की राह पकड़ी। कभी अपराधियों में खौफ भरने वाले पांडेय पूरी तरह से कृष्णभक्ति में लीन हो चुके हैं। उनका कहना है कि अध्यात्म से सबकुछ बदला जा सकता है। फिर चाहें आमजन हों या पुलिस। इन दिनों जलालाबाद के गांव कोला में कथा सुना रहे गुप्तेश्वर पांडेय ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि पुलिस सेवा व राजनीति रजोगुण हैं।

जबकि अध्यात्म की दुनिया सतोगुणी है। इसीलिए वह इस क्षेत्र में आए। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि अध्यात्मिक रही है। अपनी शिक्षा में उन्होंने संस्कृत को प्राथमिकता दी। सेवाकाल के दौरान वह कथा नहीं कर सकते थे। सेवानिवृत्ति के तीन माह बाद ही उन्होंने धार्मिक आयोजन शुरू कर दिए। छह माह बाद अयोध्या में सबसे पहली कथा की। अब जहां श्रद्धालु बुलाते हैं वहां चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि अध्यात्म कोई रहस्य नहीं है। यह जीवन जीने का सही तरीका बताता है। जीवन का लक्ष्य व उसको प्राप्त करने की विधि बताता हैं। आचरण में संयम, मर्यादा, क्षमा, करुणा, सेवा का भाव अध्यात्म से ही संभव है।

नहीं बदला पुलिस का अंग्रेजी चरित्र

पूर्व डीजीपी ने कहा कि पुलिस में आस्था का घोर संकट है। उसका अंग्रेजी चरित्र नहीं बदला है। गुलामी के दौरान पुलिस सत्ता के हाथ में शोषण का एक औजार थी। आज भी आम व्यक्ति यही मानता है कि पुलिस बड़े लोगों के हाथ की कतपुतली है। जो शोषित हैं वंचित हैं समाज के निचले पायदान पर हैं उनके लिए पुलिस निष्ठा के साथ खड़ी नहीं दिखती। इसीलिए लोगों की सोच में बदलाव नहीं आ रहा है।

विश्वास दिलाएं पुलिस जनता की सेवक

पुलिस की नकारात्मक छवि को सकारात्मक भावना से ही बदला जा सकता है। इसके लिए प्रशिक्षण की तकनीक बदलना होगी। सिपाही से लेकर अधिकारी तक को बताना होगा कि वह जनता के सेवक हैं मालिक नहीं। जिस दिन ऐसा कर लेंगे। जनता का विश्वास भी हासिल हो जाएगा। जहां तक उनकी बात है तो एक मात्र लक्ष्य कृष्ण भक्ति का प्रचार करना व हिंदुस्तान को मजबूत बनाना है।

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