चार साल की बाघिन शर्मिली की चतुराई देख एक्सपर्ट भी रह गए हैरान, जानें कैसे डेढ़ साल तक बाघिन खुद को बचाती रही

Tigress caught in bareilly मुंबई के सेठ तुलसीदास किलाचंद ने 1962 में बरेली के फतेहगंज पश्चिमी में 1270 एकड़ भूमि पर अमेरिका मे चल रही रबर फैक्ट्री का एक प्लांट शिफ्ट करके यहां लगाया था। लूमस कंपनी इसे चलाती थी। धीरे-धीरे यह फैक्ट्री घने जंगल में परिवर्तित हो गई।

Samanvay PandeyFri, 18 Jun 2021 01:05 PM (IST)
इसी टैंक में डेढ़ साल से अपना आशियाना बनाए हुए थी बाघिन शर्मिली।

बरेली, [अंकित शुक्ला]। Tigress caught in bareilly : मुंबई के सेठ तुलसीदास किलाचंद ने 1962 में बरेली के फतेहगंज पश्चिमी में 1270 एकड़ भूमि पर अमेरिका मे चल रही रबर फैक्ट्री का एक प्लांट शिफ्ट करके यहां लगाया था। लूमस कंपनी इसे चलाती थी। रबर उत्पादन के लिए एशिया में मशहूर रही फैक्ट्री 15 जुलाई 1999 को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया था। धीरे-धीरे यह फैक्ट्री घने जंगल में परिवर्तित हो गई। जिसे जंगली जानवरों ने अपना सुरक्षित ठिकाना बना लिया।हजारों वर्ग मीटर में फैली बंद फैक्ट्री में बाघिन को ढूंढना आसान नहीं था। फैक्ट्री में डेरा डाले बाघिन को तलाशने के लिए काफी मुश्किलें आईं। उसे आबादी की ओर जाने से रोकने के साथ, जान सुरक्षित रखना भी चुनौती था। कदम-कदम पर रेकी की गई, कैमरे लगाए गए। उसके ठहराव की जगह मुतमईन हो गई, तब गुरुवार सुबह छह बजे जाल से टैंक को बंद किया गया। ऑपरेशन में वन विभाग और डब्ल्यूटीआइ की टीम के साथ ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व की टीम संयुक्त रूप से लगी।

चालाकी के आगे एक्सपर्ट भी हैरान : चार साल की बाघिन शर्मिली ने एक्सपर्ट को जमकर छकाया। जिसके चलते पांच बार आपरेशन टाइगर फेल हुआ। दरअसल, बाघिन ने फैक्ट्री में जिस जगह को बेडरूम बनाया वहां आने और जाने का केवल एक रास्ता था। यही नहीं, कैमरे की फुटेज से पता चला कि वह आरामगाह तक आने-जाने के रास्ते अलग-अलग चुनती थी। बाघिन की पुख्ता लोकेशन मिलने पर टीम ने मुख्य मूवमेंट वाले रास्तों को जाल, रस्सी और लोहे के तारों से बंद किया। टैंक में बाघिन को टॉर्च की मदद से खोजा।

जमकर खाया, वजन बढ़ाया : रबर फैक्ट्री पहुंचने के बाद हर तरफ शिकार मौजूद था। शर्मिली के मुकाबले सामने दूसरा बाघ या बाघिन नहीं था। लिहाजा उसने जमकर खाया और फैक्ट्री में एकछत्र राज चलाने लगी। निर्धारित वजन से बढ़कर 150 किलो तक पहुंच गई। हालांकि, आबादी के करीब पहुंचने पर उसकी यह मौज ज्यादा दिन नहीं चलने वाली थी और.. हुआ भी यही।

साम्राज्य की हसरत में फंसती गइ शर्मिली : जिस एकतरफा साम्राज्य की हसरत में शर्मिली किशनपुरी सेंचुरी से रबर फैक्ट्री आई थी। आखिर में वही नासूर बन गई। तय था, रबर फैक्ट्री में ज्यादा दिन वह टिक नहीं पाएगी। बाघिन का हल्ला मचा तो आबादी पर खतरा मानते हुए वन विभाग और अन्य एक्सपर्ट की टीम ने उसे निशाने पर ले लिया। एक साल तीन माह चार दिन बाद वह जाल में फंस सकी है।

28 फरवरी 2018 को देखा गया था बाघ फतेह : रबर फैक्ट्री परिसर में 28 फरवरी 2018 को बाघ फतेह देखा गया था। जिसे तीन मई 2018 (64) दिन में वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ और पीलीभीत टाइगर रिजर्व की टीम ने पकड़ा था। जो कि सात फीट लंबा था। इसे पकड़ने में 56 अधिकारी व कर्मचारी लगे थे।

बाघिन को एकांत जगह आती है पसंद : वन्य जीव विशेषज्ञ डा. आरके सिंह के मुताबिक बाघिन को एकांत स्थल के साथ, नमी वाली जगह, छायादार जगह जहां पानी भी हो पसंद आती है। जो कि फैक्ट्री परिसर में मौजूद है। साथ ही शिकार आदि की भी कमी भी नहीं है।

नाम : शर्मिली

मूल निवास : किशनपुरी सेंचुरी (पार्ट आफ दुधवा नेशनल पार्क)

उम्र : करीब चार साल

वजन : 150 किलोग्राम

लंबाई : 11 फिट

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