Electricity Crisis : सौर ऊर्जा संयंत्र व एलईडी से यूपी के इस जनपद में बच रही 10 मेगावाट बिजली

Electricity Crisis शाहजहांपुर में कोयला की राष्ट्रव्यापी किल्लत से उपज बिजली संकट में सौर ऊर्जा संयंत्र व एलईडी उपकरण मुख्य भूमिका निभा रहे है। नए विकल्पों के प्रयोग से प्रकाश व्यवस्था पर करीब 80 फीसद बिजली की खपत कम हुई है।

Ravi MishraTue, 12 Oct 2021 01:29 PM (IST)
Electricity Crisis : सौर ऊर्जा संयंत्र व एलईडी से यूपी के इस जनपद में बच रही 10 मेगावाट बिजली

बरेली, जेएनएन। Electricity Crisis : शाहजहांपुर में कोयला की राष्ट्रव्यापी किल्लत से उपज बिजली संकट में सौर ऊर्जा संयंत्र व एलईडी उपकरण मुख्य भूमिका निभा रहे है। नए विकल्पों के प्रयोग से प्रकाश व्यवस्था पर करीब 80 फीसद बिजली की खपत कम हुई है। जनपद में करीब 200 घरों व प्रतिष्ठानों पर साेलर प्लांट के साथ नेट मीटर लगाकर 500 किलोवाट के करीब बिजली की बचत की जा रही है।

जनपद में 300 से 360 मेगावाट की बिजली खपत है। अडानी ग्रुप ने जलालाबाद में 50 मेगावाट, एमपी साेलर ने तिलहर में 10 मेगावाट टाटा सोलर ने बंडा में 50 मेगावाट तथा सुखवीर एग्रो ने दो किलोवाट बिजली उत्पादन कर आपूर्ति कर रहा है। करीब 200 बड़े प्रतिष्ठानों व घरों में 500 किलोवाट तक सौर ऊर्जा नेट मीटर लगाकर बिजली का आदान प्रदान किया जा रहा है। इससे बिजली की काफी बचत हो रही है। एलईडी लाइव का प्रयोग करके प्रकाश व्यवस्था का करीब 80 फीसद खर्च बचाकर 10 मेगावाट तक का तोड कम किया गया है। इससे बड़ी राहत मिल रही है।

- सौर ऊर्जा संयंत्र हर संकट का विकल्प

कोयला संकट सरीखे ऊर्जा के सीमित भंडार के दृष्टिगत सौर ऊर्जा संयंत्र भविष्य में मददगार बनेंगे। यदि 50 फीसद लोगों ने सौर ऊर्जा का प्रयोग शुरू कर दिया तो बिजली बचत के साथ प्राकृतिक संसाधन भी बचेंगे।

नगर निगम का 41 फीसद घटा बिजली बिल, क्षमता हुई ड्योढी

नगर निगम ने पारंपरिक प्रकाश उपकरणों की जगह सोलर व एलईडी लाइट लगाकर 41 फीसद बिजली बिल घटाया। जबकि प्रकाश क्षमता ड्योढ़ी हो गई है। नगर निगम के अपर आयुक्त एसके सिंह बताते है कि 2017-18 में प्रकाश व्यवस्था पर 27.30 लाख से अधिक का बिजली बिल आता था। नगर निगम ने 8604 में पारंपरिक लाइट को एलईडी व सोलर में बदल दिया। इससे बिल घटकर 15.95 लाख रह गया है। जबकि 218 नई सोलर लाइट लगी है। 200 वाट की 55 हाईमास्ट एलईडी लाइट लगाई गई है।

100 वाट बल्ब के बराबार प्रकाश देती है नौ वाट की एलईडी

अधिशासी अभियंता रंजीत कुमार बताते है कि 100 वाट के बल्ब में जितनी रोशनी होती है उसके लिए पूर्व में 40 वाट की ट्यूब लाइट प्रयोग की जाती थी। इसके बाद 18 वाट की सीएफएल लगाई गई। अब नौ वाट एलईडी लाइट समान प्रकाश दे रही है, जबकि खर्च 80 से 90 फीसद कम हो जाता है।

जनपद में सौर ऊर्जा के व्यावसायिक पावर प्लांट

- 50 मेगावाट अडानी सोलर जलालाबाद

- 10 मेगावाट एमपी सोलर तिलहर

- 50 मेगावाट टाटा बंडा निर्माणाधीन

- 2 मेगावाट सुखवीर एग्रो पुवायां

जनपद में प्रमुख संस्थान विभाग व उनमें लगे सोलर पावर प्लांट

विभाग, संस्थान : सौर ऊर्जा संयंत्र क्षमता किलोवाट में

आइओसीएल बंथरा : 100 किलोवाट

शुकदेवानंद ला कालेज : 72 किलोवाट

कलक्ट्रेट : 50

मंडी समिति रोजा : 55

एसएस विधि महाविद्यालय : 45

विकास भवन : 25

अरुण खंडेलेवाल तक्षशिला : 25

आइटीआइ रोजा : 20

शशिबाला, सुदामा प्रसाद स्कूल : 17

डिवीजनल इंजीनियर रेलवे : 16

अखिलेश दीक्षित निदान पैथालोजी : 15

संजय सक्सेना प्रताप एन्क्लेव : 10

रेनू खंडेलवाल, तारीन बहादुर गंज : 8

आरिफ बाडूजई : 8

अशोक अग्रवाल, फ्रेंड्स कालोनी : 8

संत कृपाल एकेडमी : 6

अन्य करीब 100 लोग : 400 किलोवाट

फैक्ट फाइल

- 7 से 10 रुपये प्रति यूनिट बिजली खर्च

- 3.81 रुपये प्रति यूनिट उपभोक्ताओ से बिजली खरीदता है विभाग

- 5 साल में अदा हो जाती है सोलर पलांट की कीमत

- 20 से 25 साल तक चलता है सौर ऊर्जा संयंत्र

बिजली संकट का एक विकल्प है सौर ऊर्जा । घर में संयंत्र लगवाने से 50 फीसद के करीब बिजली बचायी जा सकती है। इससे ऊर्जा के प्रकाकृतिक भंडार भी संरक्षित रहेंगे और खर्च भी कम होगा। संजय वर्मा, परियोजना अधिकारी नेडा

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