डग्गामार बसें रोडवेज को लगा रहीं हर माह 60 लाख का चूना

डग्गामार बसें रोडवेज को लगा रहीं हर माह 60 लाख का चूना
Publish Date:Thu, 22 Oct 2020 03:06 AM (IST) Author: Jagran

बरेली, जेएनएन : यात्रियों की जिदगी को खतरे में डालने वाली डग्गामार बसें रोडवेज को भी हर महीने लाखों रुपये का चूना लगा रही हैं। रोडवेज को यह चूना कम दूरी व लंबे सभी रूटों पर हो रहा है। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। यही वजह है कि सेटेलाइट बस अड्डे से चंद कदम की दूरी पर एक सामांतर बस स्टैंड विकसित हो गया, जो धड़ल्ले से चल रहा है।

परिवहन मंत्री अशोक कटारिया के निर्देश के बावजूद अभी भी डग्गामार बसें धड़ल्ले से चल रही हैं। सेटेलाइट बस स्टैंड के निकट ही डग्गामार बसों का स्टैंड धड़ल्ले से संचालित हो रहा है। हालांकि, परिवहन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि लगातार कार्रवाई हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इन बसों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। जबकि नियमानुसार परिवहन विभाग के बस स्टैंड के एक किलोमीटर दायरे में कोई प्राइवेट बस स्टैंड नहीं हो सकता। वहीं इन डग्गामार बसों से रोडवेज को हर माह 60 लाख रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। रोडवेज के अधिकारियों का कहना है कि रोजाना करीब दो लाख रुपये राजस्व का नुकसान झेलना पड़ता है।

डग्गामार बस वाले अवैध रूप से सामान ढोते हैं। कम किराए के चलते सवारियां बैठ जाती हैं। क्योंकि वे ज्यादा सवारियां बैठाकर इसकी भरपाई कर लेते हैं। जबकि रोडवेज में ऐसा नहीं हो सकता। रोडवेज की बसें खाली रहती हैं, वहीं डग्गामार बसें 54 की जगह 124 सवारियां तक ढोती नजर आती हैं। परिवहन विभाग की कार्रवाई में आंकड़ो की बाजीगरी दिखाई पड़ती है। एक सप्ताह में 70 चालान

परिवहन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि जिले में 13 से 19 अक्टूबर तक 70 गाड़ियों का चालान किया गया है और 25 गाड़ियों को बंद किया गया। वहीं मंडल भर में इस दौरान करीब 160 गाड़ियों का चालान किया गया और 48 गाड़ियों को बंद किया गया। वर्जन

हर महीने हमें करीब साठ लाख रुपये का नुकसान डग्गामार बसों की वजह से हो रहा है। ये बसें लोगों की जिंदगी को खतरे में डालकर कमाई कर रही हैं।

चीनी प्रसाद, एआरएम, बरेली डिपो डग्गामार बसों पर कार्रवाई के लिए दो टीमें बनाई गई हैं। लगातार कार्रवाई की जा रही है। टीमें छापा मारने के साथ जहां से सूचना मिलती है, वहां पर भी कार्रवाई करती हैं।

डा. अनिल गुप्ता, आरटीओ

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