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शाहजहांपुर के गांवाें में निगरानी के नाम पर समितियां कर रही खानापूर्ति, बिना सिलिंडर के चल रही सीएचसी, हालात जानकर रह जाएंगें हैरान

शाहजहांपुर के गांवाें में निगरानी के नाम पर समितियां कर रही खानापूर्ति

शाहजहांपुर में कोरोना संक्रमण व बीमारियों से लोगों को बचाने के लिए प्रशासन ने गांवों में निगरानी समितियां गठित की है। जिन्हें बाहर से आने वालों की जांच कराने के साथ-साथ होम क्वारंटाइन संक्रमितों के बारे में हर दिन स्वास्थ्य की जानकारी देना है।

Ravi MishraThu, 13 May 2021 07:04 PM (IST)

बरेली, जेएनएन। शाहजहांपुर में कोरोना संक्रमण व बीमारियों से लोगों को बचाने के लिए प्रशासन ने गांवों में निगरानी समितियां गठित की है। जिन्हें बाहर से आने वालों की जांच कराने के साथ-साथ होम क्वारंटाइन संक्रमितों के बारे में उनके घरों की कुंडी बजाकर हर दिन स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेकर अधिकारियों को बताने की जिम्मेदारी सौंपी गई। बढ़ते संक्रमण की वजह से कुछ गांवों में ही समिति के सदस्य अपनी जिम्मेदारी को ठीक से निभा रहे है। जबकि अन्य गांवों में अधिकारियों की सख्ती पर ही उनकी नींद टूटती है।

यहीं वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में न सिर्फ जागरूकता का अभाव है बल्कि जांच कराने वालों की संख्या भी कम है। जिस वजह से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को पांच दिन का विशेष अभियान तक चलाना पड़ा। इसके अलावा सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी अव्यवस्थाएं हावी है। जहां से आक्सीजन सिलिंडर जिला मुख्यालय पर भिजवा दिए गए है तो अन्य उपचार व रेफर करने के लिए भी मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।

कुंडी बजाई, चौपाल लगाकर किया जागरूक

निगोही क्षेत्र के पिपरिया खुशहाली गांव में सुबह करीब आठ बजे निगरानी समिति की सदस्य आशा कार्यकर्ता मोरकली व आंगनबड़ी कार्यकर्ता रमा देवी ग्रामीणों को कोरोना से बचाव के लिए जागरूक करने के लिए घर से निकली। ग्राम प्रधान रियासत अली के आवास के सामने पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर महिला व अन्य ग्रामीणों को बताया कि संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में बिना चिकित्सक सलाह लिए कोई भी दवा न खाए। करीब आधा घंटे बाद दोनों कार्यकर्ता घर लोगों को जागरूक करने के लिए निकल पड़ी। जो बुखार से पीड़ित थे उनके घरों की कुंडी बजाकर हालचाल जाना। साथ ही रजिस्ट्रर में उनका नाम भी लिखती गई ताकि अधिकारियों को भी इसके बारे में जानकारी दे सके। हालांकि इस गांव में कोई भी व्यक्ति बाहर से नहीं आया है।

दवाएं नहीं मिल रही अस्पताल चले जाओ

गांव में बीमार ग्रामीणों ने दो दिन पहले बुखार आने पर आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को जानकारी दी तो उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाने की सलाह दी गई। लेकिन यहां पता चला कि दवाएं नहीं मिल रही है। ऐसे में ग्राम प्रधान ने सीएमओ को फोन लगाकर जानकारी दी तब जबाव मिला कि मरीज को लेकर शाहजहांपुर अस्पताल चले आए।

तीन घंटे तड़पने के बाद मिली ऑक्सीजन

खुटार नगर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की तो इस साल सौगात मिल गई। लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मरीजों को जिला मुख्यालय पर ही जाना पड़ रहा है। दो आक्सीजन सिलिंडर के सहारे अस्पताल की व्यवस्था टिकी है। गुरुवार दोपहर नगर के मुहल्ला सरोजनी नगर निवासी एक युवक अपना स्वास्थ्य खराब होने पर चेकअप कराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। सांस लेने में दिक्कत होने की वजह से कोरोना की जांच कराई गई तो रिपोर्ट पाजिटिव आई।

इसके बाद युवक को कुर्सी पर बैठा दिया गया। लेकिन किसी कर्मचारी ने सुध नही ली। जबकि युवक स्वास्थ्यकर्मियों से बराबर गुहार लगाता रहा। करीब तीन घंटे बाद आक्सीजन दी गई। इसी तरह अन्य मरीजों का हाल भी देखने को मिला। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि आक्सीजन के दो सिलिंडर हैं। कोरोना की रिपोर्ट आते ही उपचार मरीजों को दिया जाता है।

मरीजों को भर्ती करने की कोई व्यवस्था नहीं

कलान स्वास्थ्य केंद्र पर आक्सीजन के सिलिंडर है। जिन्हें जिला मुख्यालय पर मंगवा लिया गया है। ओपीडी सेवाएं बंद होने की वजह से यहां गंभीर मरीज ही आते है। जिन्हें उपचार के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ रहा है। गुरुवार सुबह करीब दस बजे केंद्र पर कोरोना की जांच व बचाव के लिए टीका लगवाने के लिए कुछ लोग मौजूद थे। लेकिन इसी बीच बारिश शुरू हो गई। जिस वजह से उपचार के लिए गंभीर मरीज भी केंद्र पर नहीं पहुंचा।

जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परौर व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र विक्रमपुर में किसी भी डॉक्टर की तैनाती नहीं है। यहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही कभी कभार आ जाजे है। चिकित्सा प्रभारी डॉ. आरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि दो सिलिंडर थे जिन्हें संक्रमण काल में जिला मुख्यालय पर मंगवा लिए गए है। मरीजों को भर्ती करने की यहां कोई व्यवस्था नहीं है।

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