Basmati Rice Export : विश्व में ब्रांड बनेगा बासमती चावल, बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन ने किसानों का बढ़ाया उत्साह

Basmati Rice Export गंगा गोमती समेत सप्तनदियों की गोद में बसी शहीद नगरी शाहजहांपुर की बासमती विश्व बाजार में ब्रांड बन सकती है। प्रदेश के 30 जनपदों में शाहजहांपुर की माटी को बासमती उत्पादन के लिए बेहतर माना गया है।

Ravi MishraWed, 15 Sep 2021 04:08 PM (IST)
Basmati Rice Export : विश्व में ब्रांड बनेगा बासमती चावल, बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन ने किसानों का बढ़ाया उत्साह

बरेली, जेएनएन। Basmati Rice Export : गंगा, गोमती समेत सप्तनदियों की गोद में बसी शहीद नगरी शाहजहांपुर की बासमती विश्व बाजार में ब्रांड बन सकती है। प्रदेश के 30 जनपदों में शाहजहांपुर की माटी को बासमती उत्पादन के लिए बेहतर माना गया है। एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अर्थाटी ने भी नदियों के किनारे के जिलों केा बासमती उत्पादन व एक्सपोर्ट के लिए उत्कृष्ट मानते हुए एजेंडे में शामिल कर लिया है। गत दिनों बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन की कार्यशाला के बाद किसानों में भी बासमती उत्पादन के प्रति बढ़ा क्रेज बढ़ा है।

फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों ने बासमती उत्पादन में बढ़ाए कदम

जनपद में 100 के करीब कृषक उत्पादक संगठन (फार्मर प्रोड्यूसर आर्गानाइजेशन) हैं। इनमें दस एफपीओ सक्रिय है। नाबार्ड के वित्तीय सहयोग से 2016 में शहीद भूमि बासमती प्रोड्यूसर कंपनी का गठन हुआ। इस कंपनी से जुड़े 1053 किसान 485 हेक्टेयर में बासमती बीज उत्पादन कर रहे है। भावना सेवा संस्थान शहीद भूमि कंपनी से जुड़े किसानों को बासमती उत्पादन के लिए प्रेरित कर उनकी आय मेे इजाफा केलिए घर बैठे विपणन की व्यवस्था कर रही है। इसी तरह सरस्वती एजुकेशनल सोसाइटी, गंगा भूमि बासमती प्रोड्यूसर कंपनी को प्रोत्साहित कर रही है।

गंगा गोमती समेत नदियों के किनारे बने कलस्टर

कलान तहीसल के गंगा ग्रामों में बासमती उत्पादन के लिए 150 हेक्टेयर के तीन कलस्टर बनाए गए हैं। इसी तरह ददरौल विकास खंड में गर्रा नदी तथा बंडा, खुटार व पुवायां में गोमती नदी के किनारे बासमती उत्पादन लिए कलस्टर बनाकर किसानों को बासमती उत्पादन के लिए प्रेरित किया गया है। पूर्णत: जैविक उत्पादन की वजह से नदियों के किनारे की बासमती की विश्वबाजार में भी मांग बढ़ रही है।

30 हजार हेक्टेयर के पार पहुंचा पहुंचा बासमती का रकबा

जनपद में 2.65 लाख हेक्टेयर में धान की पैदावार होती है। दशक पूर्व तक बासमती उत्पादन एक हजार हेक्टेयर से कम पर सीमित था। पुवायां में सुखवीर एग्रो की स्थापना तथा कृषक उत्पादक संगठनाें की दस्तक से रकबा 30 हजार हेक्टेयर के पार पहुंच गया है। नमामि गंगे परंपरागत जैविक खेती परियोजना के तहत शाहजहांपुर के अलावा बिजनौर, बुलंदरशहर, कासगंज, बदायूं, फर्रुखाबाद, कन्नौज, हरदोई, उन्नाव, गाजीपुर, बलिया आदि नदी के समीपवर्ती गांवों में जैविक बासमती उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है।

किसानों ने इस बार पूसा नई दिल्ली की बासमती किस्म एचडी 3226, एचडी 3086 के बीज का उत्पादन किया है। कंपनी ने 1975 रुपये प्रति क्विंटल के भाव धान खरीद लिया है। बीज विधायक संयंत्र में ग्रेडिंग के बाद बीज बिक्री किया जाएगा। कंपनी के मुनाफा में कृषक सदस्यों का भी लाभांश रहेंगा। डा. एसके सिंह निदेशक शहीद भूमि बासमती प्रोड्यूसकर कंपनी

नमामि गंगे योजना के तहत गंगा ग्रामों में पूर्णता जैविक बासमती का उत्पादन कराया जा रहा है। बाजार में गंगा भूमि बासमती की मांग है। जल्द ही जनपद की बासमती विश्व में ब्रांड बनेगी। राकेश पांडेय, निदेशक गंगा भूमि बासमती प्रोड्यूसर कंपनी

भाैगोलिक उपदर्शन में शाहजहांपुर समेत पश्चिमी उप्र के तीस जिलों की मृदा व जलवायु बासमती उत्पादन के लिए मुफीद है। गंगा, गोमती आदि नदियेा के किनारे की भूमि पर यदि किसान बासमती का जैविक उत्पादन करें तो विश्व बाजार में शाहजहांपुर की बासमती ब्रांड बन सकती है। वर्तमान में देश के कुल बासमती निर्यात में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों का 25 से 30 फीसद योगदान है। डा. रितेश शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक, बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन

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