Bareilly-Sitapur Highway : बरेली-सीतापुर राजमार्ग के निर्माण में खेल, फिर बढ़ेगी चार सौ करोड़ लागत, जानिए डेढ़ साल में कितने फीसद हो सका काम

Bareilly-Sitapur Highway पिछले 11 साल से बदहाल बरेली-सीतापुर राजमार्ग का निर्माण फिर एक बार रुकने की नौबत आ गई है। कार्यदायी संस्थाएं बीस माह में सिर्फ 37 फीसद मार्ग का निर्माण कर पाई हैं। अब निर्माण के एस्टीमेट में वेरिएशन (अंतर) को लेकर मामला अटक गया है।

Ravi MishraFri, 17 Sep 2021 08:58 AM (IST)
Bareilly-Sitapur Highway : बरेली-सीतापुर राजमार्ग के निर्माण में खेल, फिर बढ़ेगी चार सौ करोड़ लागत

बरेली, जेएनएन। Bareilly-Sitapur Highway : पिछले 11 साल से बदहाल बरेली-सीतापुर राजमार्ग का निर्माण फिर एक बार रुकने की नौबत आ गई है। कार्यदायी संस्थाएं बीस माह में सिर्फ 37 फीसद मार्ग का निर्माण कर पाई हैं। अब निर्माण के एस्टीमेट में वेरिएशन (अंतर) को लेकर मामला अटक गया है। ऐसे में प्रोजेक्ट की लागत करीब चार सौ करोड़ बढ़ानी पड़ सकती है। हालांकि एनएचएआइ के अधिकारी अनुबंध के हिसाब से ही कार्य कराने की बात कह रहे हैं।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने वर्ष 2010 में 157 किलोमीटर लंबे बरेली-सीतापुर राजमार्ग (एनएच-30) के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण का काम इरा कंपनी को दिया था। पब्लिक, प्राइवेट, पार्टनरशिप (पीपीपी) माडल के इस कार्य की लागत करीब 2200 करोड़ रुपये थी। इरा कंपनी के अधूरे काम करने पर वर्ष 2019 में उसका ठेका निरस्त कर दिया गया। इसके बाद एनएचएआइ ने दिल्ली की एक कंसल्टेंट कंपनी से बचे हुए मार्ग को पूरा करने के लिए 822 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनवाया।

अक्टूबर 2019 में यह काम आगरा के राज कार्पोरेशन लिमिटेड (आरसीएल) के साथ ज्वाइंट वेंचर (जेवी) में जगदीश सरन और सिद्धार्थ कंस्ट्रक्शन कंपनी ने 697 करोड़ की न्यूनतम बिड पर लिया। कार्यदायी संस्थाओं को मार्च 2021 तक का समय कार्य को पूरा करने के लिए दिया गया था, लेकिन काम 37 फीसद ही पूरा हो पाया है। इधर, कोविड के कारण नौ माह बढ़ाकर दिसंबर 2021 कर दिया गया। इस प्रगति से कार्य 2022 में भी पूरा होने की संभावना कम है।

अब चार सौ करोड़ और बढ़ाने की तैयारी

विभागीय सूत्रों के अनुसार 697 करोड़ रुपये में कार्य पूरा नहीं हो सकता है। इस कारण करीब चार सौ करोड़ रुपये का वेरिएशन करने की तैयारी की जा रही है। इस बाबत एक संस्था ने चार सौ करोड़ रुपये के वेरिएशन की रिपोर्ट बनाकर दी है, जिसे एनएचएआइ के अधिकारियों ने हेडक्वार्टर को अनुमोदन के लिए भेजा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब एनएचएआइ ने बचे हुए काम का एस्टीमेट तैयार किया तभी इस पर ध्यान क्यों नहीं रखा गया, जबकि सर्वे के लिए प्राधिकरम ने कंसल्टेंट कंपनी को 70 लाख रुपये डीपीआर बनाने को दिए थे।

बची हुई बिल आफ क्वांटिटी के आधार पर हुआ टेंडर 

बरेली-सीतापुर राजमार्ग के निर्माण में शुरुआत से ही खेल हुआ। 11 साल पहले बने 2200 करोड़ रुपये के एस्टीमेट में कितनी सरिया, मिट्टी, आरई वाल समेत अन्य आइटम की विस्तृत बिल आफ क्वांटिटी बनी थी। सूत्रों का कहना है कि पीपीपी माडल के तहत निर्माण को लगी इरा कंपनी ने अपने काम की प्रगति ज्यादा दिखाई और प्राधिकरण के अफसर उस पर अपनी मुहर लगाते रहे। कार्य की प्रगति के अनुसार ही इरा कंपनी को बैंक से रकम मिलती रही।

इस तरह करीब 1400 करोड़ रुपये की बिल आफ क्वांटिटी का इस्तेमाल हो गया। इसके बाद बची हुई करीब आठ सौ करोड़ की बिल आफ क्वांटिटी के आधार पर नया टेंडर किया गया, जिसमें ज्वाइंट वेंचर ने टेंडर लागत 767 करोड़ का नौ फीसद नीचे दरों पर 697 करोड़ की न्यूनतम बिड पर काम लिया। टेंडर बचे हुए काम के आधार पर नहीं हुआ।

बरेली-सीतापुर राजमार्ग के निर्माण की गति काफी धीमी है। कार्यदायी संस्था को कार्य की गति बढ़ाने के लिए कहा है। अगर संस्था काम करती है तो ठीक, वर्ना उसे हटा दिया जाएगा। अमित रंजन चित्रांशी, परियोजना निदेशक, एनएचएआइ

हमें जितना काम बताया गया, मौके पर उससे कही ज्यादा काम है। बिल आफ क्वांटिटी में रखी गई निर्माण सामग्री की संख्या काफी कम है। फिर भी सड़क समेत कई पुलों का काम कराया है। एसएन सिंह, महाप्रबंधक, राज कार्पोरेशन लिमिटेड

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