बरेली में स्वच्छ भारत मिशन : बने नहीं शाैचालय, ओडीएफ घोषित हो गए गांव, अब मिल रहा आश्वासन

खुले में शौच के लिए न जाना पड़े इसके लिए सरकार की ओर से स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत घर-घर शौचालय बनाए जा रहे हैं। लेकिन अभी भी गांव में कई ऐसे घर हैं जहां शौचालय की सुविधा नहीं मिल सकी है।

Ravi MishraThu, 09 Dec 2021 03:42 PM (IST)
बरेली में स्वच्छ भारत मिशन : बने नहीं शाैचालय, ओडीएफ घोषित हो गए गांव, अब मिल रहा आश्वासन

बरेली, जेएनएन। खुले में शौच के लिए न जाना पड़े, इसके लिए सरकार की ओर से स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत घर-घर शौचालय बनाए जा रहे हैं। लेकिन, अभी भी गांव में कई ऐसे घर हैं, जहां शौचालय की सुविधा नहीं मिल सकी है। जिले में 1,193 ग्राम पंचायतों में करीब 3,500 से अधिक गांव हैं। विभाग की ओर से इन सभी गांव को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) घोषित तो कर दिया गया, लेकिन हकीकत यह है कि शत-प्रतिशत घरों में शौचालय नहीं हैं। कई गांवों में अभी भी कुछ ही परिवारों में शौचालय बने सके हैं।

मेवापट्टी के महिपाल ने बताया कि उन्होंने तत्कालीन प्रधान से शौचालय बनवाने के लिए कहा लेकिन, उनकी समस्या का भी समाधान नहीं हो सका। उन्हें और परिवार में पत्नी और बच्चों को भी डरते-डरते मजबूरी में बाहर जाना पड़ता है। वाहवाही लूटने के लिए अफसरों ने छोटे गांवों को ओडीएफ बनाने के अभियान में शामिल कर लिया। भुता ब्लाक क्षेत्र के कई गांवों में अभी भी शौचालय नहीं बनाए गए हैं।

गांव शिवनगर में संजू, यशपाल ने कई बार अपने यहां शौचालय बनाने के लिए आवेदन किया। लेकिन, अब तक उनके घर इस सुविधा से दूर हैं। गांव सिमरा बहोरनगला में शिवनारायण, राधाकृष्ण और गांव फैजनगर में विजय सिंह, सीता देवी समेत दर्जनों लोगों के घर शौचालय नहीं बन सके हैं। वहीं भिटौरा गांव में कौशल शर्मा, अरविंद कुमार, पंकज वर्मा, रोशन लाल वर्मा, पंकज कुमार, राजेश कुमार का परिवार शौच के लिए बाहर जाने के लिए मजबूर हैं।

केस- एक

भुता ब्लाक के गांव शिवनगर निवासी महेंद्र पाल ने बताया कि वह दिव्यांग हैं। आर्थिक स्थिति सही न होने की वजह से दो सालों से लगातार शौचालय के लिए विभाग के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन, हर बार अधिकारियों से आश्वासन सुनकर ही वापस लौटना पड़ता है।

केस- दो

गांव शिवनगर में शोभाराम ने बताया कि उन्होंने प्रधान से बात करने के साथ ही विभाग में कई बार जाकर अधिकारियों से बात की। हर बार निराश होकर ही लौटना पड़ा। कुछ महीने पहले विभाग से कुछ लोग जगह का जायजा लेने के लिए आए। मगर, उसके बाद आज तक कोई प्रक्रिया नहीं हो सकी है।

केस- तीन

गांव शिवनगर के ही तेजीराम ने बताया कि पिछले साल कई बार चक्कर काटने के बाद अधिकारियों ने एक दो महीने का वक्त दिया था। कोई बात नहीं बनी तो फिर अधिकारियाें से गुहार लगाई। इस पर उन्होंने प्रधान से बात करने के लिए कहा लेकिन, प्रधान की ओर से कोई जवाब नहीं मिल सका।

जिले में सभी गांव ओडीएफ हैं। शौचालय की सुविधा न मिलने की कोई शिकायत भी नहीं आई। किसी परिवार को अगर सुविधा नहीं मिली है तो वह विभाग में आकर शिकायत दर्ज कराए। - धर्मेंद्र कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी

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