Bareilly Black Fungus Infection News : ऑक्सीजन की कमी वाले मरीजों में ब्लैक फंगस का ज्यादा खतरा, जानिये कैसे करें बचाव

ऑक्सीजन पर निर्भर लोगों की अस्पताल में मेंटेन नहीं हो रही ओरल आइजीन, बढ़ जाता फंगस का खतरा।

Bareilly Black Fungus Infection News कोरोना संक्रमण के बाद अब ब्लैक फंगस से जुड़े मामले देश में बढ़ने लगे हैं।विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना संक्रमित या संक्रमण से निकल चुके व्यक्ति में ब्लैक फंगस होने की बड़ी वजह ओरल हाइजीन का मेंटेन न रखा जाना भी है।

Samanvay PandeySat, 15 May 2021 08:10 AM (IST)

बरेली, (अंकित गुप्ता)। Bareilly Black Fungus Infection News : कोरोना संक्रमण के बाद अब म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) से जुड़े मामले देश में बढ़ने लगे हैं। जिले में भी एक मरीज में इसकी पुष्टि हो चुकी है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना संक्रमित या संक्रमण से निकल चुके व्यक्ति में ब्लैक फंगस होने की बड़ी वजह ओरल हाइजीन का मेंटेन न रखा जाना भी है। बताते हैं कि जो संक्रमित ऑक्सीजन पर होता है उसके मुंह की कई दिन तक सफाई नहीं हो पाती।

ऐसे में लगातार ह्यूमिडीफाइड ऑक्सीजन उसके अंदर जाने से मुंह में ब्लैक फंगस बनने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए कोविड संक्रमित व्यक्ति को ऑक्सीजन दिए जाने के दौरान ओरल हाइजीन का मेंटेन रखना जरूरी है।कोविड संक्रमण की दूसरी लहर में ऐसे संक्रमितों की संख्या अधिक रही, जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी।जिले के आंकड़ों के मुताबिक बीते वर्ष ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने वाले मरीजों की तुलना में इस बार यह संख्या तीन गुनी रही।

एसआरएमएस के माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डा.राहुल गोयल बताते हैं कि संक्रमित व्यक्ति को अगर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है तो उसे कम से कम पांच से सात दिन तक ऑक्सीजन लगानी पड़ती है। इस दौरान उनके स्वजन उनसे दूर होते हैं और मेडिकल स्टाफ मरीज की साफ सफाई या ओरल हाइजीन का ध्यान नहीं रखता।

इसके चलते मरीज के मुंह और नाक में लगातार आक्सीजन जाने के चलते सफेद पपड़ी जम जाती है, यहीं से फंगस व्यक्ति में प्रवेश कर जाता है जो खून के साथ बह कर फेफड़ों, नाक, आंख और मष्तिष्क में प्रवेश कर जाता है। इसके बाद यह जिस जगह असर करता है वह जगह पहले लाल और बाद में सूजन के साथ काली पड़ने लगती है।

ह्यूमिडीफाइड ऑक्सीजन में जल्दी पनपता फंगस : माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डा. राहुल गोयल बताते हैं कि फंसग तो वातावरण में पहले से ही होता है। सामान्य व्यक्ति में तो रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है तो वह इसे नष्ट कर देता है। इसके अलावा हम जब नार्मल तरह से ऑक्सीजन लेते है तो उसमें नाइट्रोजन की मात्रा ज्यादा होती है, लेकिन जब मरीज में पाइप लाइन या सिलिंडर के जरिए ऑक्सीजन दी जाती है तो वह ह्यूमिडीफाइड (वाष्पीकृत) ऑक्सीजन होती है। जिसमें नाइट्रोजन न के बराबर होती है। इसमें फंगस ज्यादा जल्दी पनपते हैं और तेजी से काम करते हैं।

पानी को बॉटल करें प्रतिदिन साफ: डा. राहुल गोयल बताते हैं कि मरीज को ड्राई ऑक्सीजन नहीं दी जाती है, उन्हें ह्यूमिडीफाइड ऑक्सीजन देते हैं। इसे ह्यूमिडीफाइर के जरिए पास करते हैं। जो पानी के जरिए मास्क के रास्ते जाती है। अगर पनी की बॉटल को प्रतिदिन साफ नहीं किया जाएगा तो पानी में फंगस बन सकती है जो मुंह और नाक के जरिए शरीर में जा सकती है। इसलिए जरूरी है कि प्रतिदिन बॉटल के पानी को प्रतिदिन बदला जाए।

पाइन लाइन में भी हो सकता फंगस : जिला सर्विलांस अधिकारी और एसआरएमएस मेडिकल कालेज के नोडल अधिकारी डा. रंजन गौतम बताते हैं कि अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए पाइप लाइन डाली हुई है। प्लांट से सप्लाई शुरू होकर इन पाइप लाइन के जरिए मरीज को दी जाती है। अगर पाइप लाइन की ठीक से सफाई नहीं हुई है तो इसमें भी फंगश बन सकता है जो ऑक्सीजन के जरिए व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर सकती है। इसलिए जरूरी है कि पाइप लाइन की महीने में दो बार मेंटीनेस या साफ सफाई की जाए। इसके अलावा मरीज के मुंह की सफाई भी प्रतिदिन की जाए।

ओरल हाइजीन मेंटेन रखने के उपाय

- सामान्य व्यक्ति तो दिन में दो बार ब्रश करें और तालुका को साफ रखें।

- मरीज अगर होश में है तो सामान्य व्यक्ति की तरह प्रतिदिन मुंह साफ करें।

- मरीज अगर होश में नहीं है तो डेमिकल माउथ पेंट डालकर मुंह साफ कर सकते हें।

- जिस व्यक्ति को ऑक्सीजन लगी है और होश में नहीं है तो मेडिकल स्टाफ या फीजियो द्वारा प्रतिदिन उनकी मुंह की सफाई करानी चाहिए। यह सिर्फ कोविड में ही नहीं नॉन कोविड मरीजों के साथ करना होगा।

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