सड़कों पर छिड़काव से बदली बरेली की आबोहवा, रेड से यलो जोन में पहुंचे कई क्षेत्र, जानिए कितना हुआ बदलाव

Air Pollution in Bareilly शहरवासियों को प्रदूषण के खतरे से बचाने के लिए मिला-जुला प्रयास रंग ला रहा है। पिछले तीन दिनों में शहर के इलाकों का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) कुछ हद तक कम हुआ। दैनिक जागरण की टीम ने ‘कुमाऊं का गेट’ यानी बरेली की आबोहवा परखी।

Ravi MishraTue, 23 Nov 2021 08:46 AM (IST)
सड़कों पर छिड़काव से बदली बरेली की आबोहवा, रेड से यलो जोन में पहुंचे कई क्षेत्र, जानिए कितना हुआ बदलाव

बरेली, जेएनएन। Air Pollution in Bareilly : शहरवासियों को प्रदूषण के खतरे से बचाने के लिए मिला-जुला प्रयास रंग ला रहा है। पिछले तीन दिनों में शहर के इलाकों का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) कुछ हद तक कम हुआ। दैनिक जागरण की टीम ने ‘कुमाऊं का गेट’ यानी बरेली की आबोहवा को बीते गुरुवार और शुक्रवार को शहर में आठ जगह शहर की वायु गुणवत्ता का जायजा लिया था। चौपुला पुल और गढ़ी चौकी के पास टूटी सड़कों और उस पर भीड़ का आलम ऐसा था कि खुली हवा में दिन भर सांस लेना भी खतरनाक था। वहीं लाल फाटक के पास निर्माण कार्य से हालत बेहद खराब मिले थे। जागरण ने इस पर समाचारीय अभियान चलाया तो नगर निगम हरकत में आया। टूटी सड़कों पर छिड़काव किया गया। वहीं निर्माणाधीन नालों पर हरे पर्दे की ओट लगाई गई। इसका असर ये रहा कि शहर में प्रदूषण का स्तर कुछ हद तक कम हुआ। दैनिक जागरण की टीम ने शहर में गुरुवार के बाद फिर से वायु गुणवत्ता परखी तो यह हकीकत सामने आई। चौपुला पुल और गढ़ी चौकी के पास टूटी सड़कों और उस पर भीड़ का आलम पहले जैसा ही दिखा, मगर पानी के छिड़काव के चलते जहरीली हवा में कुछ सुधार दिखा है। वहीं लाल फाटक के आसपास हालात पहले से बेहतर मिले। सोमवार को फिर से दैनिक जागरण की चार प्रमुख जगहों की वायु गुणवत्ता रिपोर्ट...।

रेड नहीं अब यलो कैटेगरी में अधिकांश इलाके 

जागरण की टीम ने जब गुरुवार को शहर की वायु गुणवत्ता के हाल चेक किए थे। तो चौकी चौराहा व गढ़ी चौकी में एक्यूआइ 400 या इसके पार था, यानी रेड कैटेगरी में। सोमवार को दोबारा प्रदूषण स्तर मापा तो यहां वायु प्रदूषण 300 से कम, यानी यलो जोन में था। इसी तरह लाल फाटक, चौकी चौराहा, पटेल चौक, किला, डेलापीर जैसे इलाकों में वायु प्रदूषण पहले से कम मिला। खास बात कि सोमवार को शहर में ज्यादा यातायात भार होता है, बावजूद इसके प्रदूषण स्तर आम दिनों से कम था।

ठंड में बढ़ जाता है शहर का एक्यूआइ लेवल 

पर्यावरणविद डीके सक्सेना का कहना है कि ठंड के मौसम में धूल के कण वायु में जमीन की निचली सतह पर होते हैं। मौसम में नम होने से धूल के छाेटे- छोटे कण भी ऊपर नहीं जा पाते हैं। इसलिए ठंड बढ़ने के साथ ही शहर का एक्यूआइ लेवल बढ़ता जाता है। दो से तीन दिन भरपूर धूप निकलने से मौसम साफ होने से वायु की गुणवत्ता धीरे धीरे बेहतर होती जाएगी। उनका कहना है कि जाड़े के मौसम में प्रशासन को वायु गुणवत्ता मेनटेन रखने के लिए सख्ती से काम करने की जरूरत है। पानी के छिड़काव से लोगों को मिलने वाली राहत लंबे समय तक तभी हो सकती है जब मानकों का पालन करते हुए निर्माण कार्य हों। वहीं लोग भी अनावश्यक प्रदूषण न करें।

इस वजह से शहर की हवा हो रही जहरीली 

शहर में खुदी पड़ी या जर्जर सड़कों से उठने वाली धूल और ऐसी जगह पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों के इंजन पर ज्यादा जोर पड़ता है। इससे वाहनों से धुआं भी ज्यादा निकलता है। ऐसे में धुल और धुएं का काकटेल मुसाफिरों के लिए मुसीबत का सबब बनता है। वहीं सार्वजनिक स्थलों पर हो रहे निर्माण में नियमों का पालन नहीं किया जाता है। जिससे लोगों की सांसों को खतरा पैदा होता जा रहा है।

गढ़ी चौकी : आबादी करीब 60 हजार

गुरुवार

समय : 1:55 बजे

एक्यूआइ: 415

सोमवार

समय : 2:28 बजे

एक्यूआइ: 364

चौपुला चौराहा : आबादी : 40 हजार

गुरुवार

समय - 2:22 बजे

एक्यूआइ : 400

सोमवार

समय : 2:45 बजे

एक्यूआइ: 312

लाल फाटक : आबादी 70 हजार

गुरुवार

समय : 03.15 बजे

एक्यूआइ : 346

सोमवार

समय : 2.03 बजे

एक्यूआइ : 314

पटेल चौक : आबादी : 50 हजार

गुरुवार

समय : 01.15 बजे

एक्यूआइ : 215

सोमवार

समय : 2.34 बजे

एक्यूआइ : 180

शहर में निर्माण कार्यों पर आवश्यक रूप से मानकों का पालन करते हुए ही कार्य कराने के निर्देश ठेकेदारों को दिए हैं, इसका समय-समय पर निरीक्षण भी किया जाएगा। वहीं शहर की जर्जर सड़कों पर भी समय-समय पर पानी का छिड़काव होगा। - अभिषेक आनंद, नगर आयुक्त, नगर निगम

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