Badaun Drama Mishap News : जिंदगी का खेल खत्म हाेने के बाद बच्चे बाेलें- शिवम नीचे उतर आओ, अब नाटक खत्म हो गया

Badaun Drama Mishap News शिवम नीचे उतर आओ अब नाटक खत्म हो गया। बच्चे उसे लगातार आवाज दे रहे थे पहले समझा कि शिवम नाटक ही कर रहा है। बार-बार आवाज देने के बाद भी जब उसकी आवाज नहीं निकली तो बच्चे डर गए और चिल्लाने लगे।

Ravi MishraFri, 30 Jul 2021 03:34 PM (IST)
Badaun Drama Mishap News : जिंदगी का खेल खत्म हाेने के बाद बच्चे बाेलें

बरेली, जेएनएन। Badaun Drama Mishap News : शिवम, नीचे उतर आओ अब नाटक खत्म हो गया। बच्चे उसे लगातार आवाज दे रहे थे, पहले समझा कि शिवम नाटक ही कर रहा है। बार-बार आवाज देने के बाद भी जब उसकी आवाज नहीं निकली तो बच्चे डर गए और चिल्लाने लगे। आस-पड़ोस के लोग दौड़कर पहुंचे तब तक शिवम के जिंदगी का खेल खत्म हो चुका था। बिलखती मां के करुण क्रंदन से हर किसी की आंख नम हो रही थी। साथ में खेल रहे बच्चे भी सहमे रहे, उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक क्या हो गया।

सदर तहसील क्षेत्र के बावट गांव में भूरे का कच्चा मकान है। आर्थिक रूप से कमजोर भूरे अपनी पत्नी आरती के साथ मेहनत-मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करता है। उसके माता-पिता गांव में ही अलग मकान में रहते हैं, जबकि उसके दो भाई दिल्ली में मेहनत-मजदूरी करते हैं। भूरे का बेटा शिवम काफी दिनों से ननिहाल में रह रहा था, कुछ दिनों पहले घर आकर रहने लगा था। भूरे और आरती की वह इकलौता बेटा था, इसलिए उसको दोनों बहुत लाड करते थे। अक्सर दोनों काम पर चले जाते थे तो बेटा घर पर ही आसपास के बच्चों के साथ खेलता रहता था।

खेत पर जाने से पहले मां ने समझाया था कि बेटा शरारत मत करना, हम लोग जल्दी लौट आएंगे। बच्चों की टोली में कुछ स्कूल जाने वाले बच्चे भी थे, जबकि शिवम स्कूल नहीं जाता था। किसी बच्चे ने स्कूल में 15 अगस्त को होने वाले सरदार भगत सिंह नाटक के बारे में चर्चा की और सभी बच्चे वह नाटक खेलने लगे थे। बच्चों को क्या खबर थी कि खेल-खेल में किसी की जान चली जाएगी। इकलौता बेटे की मौत हो जाने से मां रोते-रोते बेसुध हो जा रही थी। होनी को भला कौन टाल सकता है, आसपड़ोस के लोग भूरे और आरती को यही समझा रहे हैं।

बच्चों के खेल पर भी नजर रखना जरूरी

अक्सर बच्चों के खेल में मशगूल हो जाने से अभिभावक अपने काम में जुट जाते हैं। खेल-खेल में बच्चों के साथ हादसा हो जाता है। मनोवैज्ञानिक डा.महेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि बच्चों को खेलने में आनंद आता है, उन्हें खेलना से नहीं रोकना चाहिए, लेकिन उन पर निगरानी जरूरी होती है। बच्चों को यह ज्ञान नहीं होता कि किस खेल का क्या दुष्प्रभाव होता है। बच्चे किस तरह का खेल खेल रहे हैं, कहीं चोट लगने या किसी दुर्घटना की आशंका तो नहीं है, इसका ख्याल रखा जाना चाहिए। मोबाइल पर लगातार गेम खेलने वाले बच्चों को भी रोकना चाहिए।

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