डेढ़ साल पहले गायब किशोरी घर से सात किलोमीटर दूर मिली, कागजों में तलाश करती रही बरेली पुलिस

डेढ़ साल पहले नाबालिग के अपहरण का मुकदमा हुआ।

मां की डांट से नाराज होकर डेढ़ साल पहले इज्जतनगर से भागी किशोरी को पुलिस तलाश नहीं कर सकी। वह भी तब जब डेढ़ साल से किशोरी घर से महज सात किलोमीटर की दूरी पर अपना ठिकाना बनाकर रही है। इस दौरान वह किसी तरह अपना जीवन बसर करती रही।

Publish Date:Sat, 16 Jan 2021 08:30 AM (IST) Author: Sant Shukla

 बरेली, जेएनएन। मां की डांट से नाराज होकर डेढ़ साल पहले इज्जतनगर से भागी किशोरी को पुलिस तलाश नहीं कर सकी। वह भी तब जब डेढ़ साल से किशोरी घर से महज सात किलोमीटर की दूरी पर अपना ठिकाना बनाकर रही है। इस दौरान वह किसी तरह अपना जीवन बसर करती रही। स्वजन तलाश करते रहे लेकिन किसी की नजर में वह नहीं आ सकी। सबसे बड़ी नाकामी तो पुलिस की रही डेढ़ साल पहले नाबालिग के अपहरण का मुकदमा हुआ। डेढ़ साल में चार विवेचक बदल गए लेकिन किसी ने भी किशोरी की तलाश करने की जहमत नहीं उठाई। वह भी तब जब लड़की के माता-पिता ने उसकी उम्र महज 11 वर्ष लिखाई थी। पांंच दिन पहले एसएसपी इज्जतनगर थाने का निरीक्षण करने पहुंचे। विवेचना को लेकर मीटिंग की। इस दौरान 11 साल की बच्ची का केस पर नजर गई। अबतक उसकी बरामदगी नहीं होने को लेकर उन्होंने क्लास लगा दी। किशोरी की बरामदगी के लिए चेतावनी जारी कर दी। जिसके बाद हड़कंप मच गया। जो काम पिछले डेढ़ साल में नहीं हो सका पुलिस ने वही काम पांच दिन में पूरा कर किशोरी को श्यामगंज क्षेत्र से बरामद कर लिया।

मुकदमे की विवेचना कर रहे चौकी इंचार्ज सन्नी चौधरी ने बताया कि उन्हें यह केस एक महीने पहले ही मिला था। पूर्व में चार दारोगाओं ने केस की विवेचना की लेकिन लड़की की बरामदगी तो दूर लड़की कहा है इसकी तक जानकारी नहीं हुई। एसएसपी के निर्देश के बाद उन्होंने इस पर काम शुरू किया तो पता चला कि किशोरी श्यामगंज क्षेत्र में देखी गई है। एक-एक कड़ी को जोड़ते हुए गुरुवार दोपहर को श्यामगंज क्षेत्र से लड़की बरामद हो गई।

पांच मई 2019 को भागी थी किशोरी

पुलिस की माने तो किशोरी की मां ने उसे पांच मई को उसे डांट दिया था। नाराज होकर वह घर से चली गई। तलाश करने पर नहीं मिली तो छह मई को पुलिस ने अपहरण का मुदकाम दर्ज किया था। उसके बाद से किशोरी की तलाश की जा रही थी।

कागजों में विवेचना, बरामदगी के प्रयास के फाड़ रहे थे पर्चे

सबसे पहले विवचेना दारोगा सुनील भारद्वाज को मिली, उसके बाद दारोगा नाजिर अली ने विवेचना की। इसके बाद एक अन्य दारोगा ने विवेचना की फिर विवेचना दारोगा कमल सिंह को मली। लापरवाही का आलम यह था कि कागजों में पुलिस दौड़भाग करती रही। बरामदगी के लिए कहां-कहां गए इसके लिए विवेचक पर्चे भी फाड़ रहे थे लेकिन सारा काम कागजों तक ही रहा।

वर्जन

किशोरी को बरामद कर लिया गया है। उससे बातचीत की जा रही है। डेढ़ साल बाद किशोरी को सकुशल मिलना पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी रही। लापरवाही बरतने वाले विवेचकों की जांच की जाएगी।

रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी

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