अनियोजित विकास में पर्यावरण का सत्यानाश

कलेक्ट्रेट के गांधी सभागार में मंगलवार को सतत विकास एवं कर्मयोग विषयक कार्यशाला हुई थी। कार्यशाला में महानिदेशक उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी एल वेंकटेश्वर लू ने विकास के साथ ही पर्यावरण संरक्षण पर बल भी दिया।

JagranWed, 28 Jul 2021 11:55 PM (IST)
अनियोजित विकास में पर्यावरण का सत्यानाश

बाराबंकी : कलेक्ट्रेट के गांधी सभागार में मंगलवार को सतत विकास एवं कर्मयोग विषयक कार्यशाला हुई थी। कार्यशाला में महानिदेशक उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी एल वेंकटेश्वर लू ने विकास के साथ ही पर्यावरण संरक्षण पर बल भी दिया। इस कार्यशाला के आयोजन के उद्देश्य पर गौर करने से जिले के अनियोजित विकास और पर्यावरण के विनाश की ओर बरबस ही ध्यान आकृष्ट होता है। जिले का 'बाराबंकी' रखे जाने के पीछे शहर नवाबगंज के बागों से घिरे होने की मंशा ही रही होगी।

दशहराबाग, हजाराबाग, कटलही बाग, लखपेड़ाबाग, कंपनी बाग, महुआरी पुरवा जैसे नाम ऐसे ही नहीं पड़े। वास्तव में यहां बाग हुआ करती थी। अनियोजित विकास में बागों के स्थान पर मुहल्ले बस गए।

हजाराबाग में करीब एक हजार आम के पेड़ थे, वर्ष 2009 से 2012 के मध्य बाग काटकर प्लाटिग की गई। अब यहां बड़े-बड़े भवन बने हैं। इसी के बगल जिसे महुआरी पुरवा कहा जाता है वहां महुआ की बाग हुआ करती थी। कटहली बाग भी वर्ष 2000 से 2010 के मध्य काटकर प्लाटिग कर दी गई। दशहराबाग में पंचमदास कुटी की बाग वर्ष 2016 में काट दी गई।

सफेदाबाद के लखनऊ-अयोध्या मार्ग के दोनों तरफ बागों को काटकर आवासीय कालोनी बनाई गई हैं। अभी भी यहां पेड़ों को केमिकल डालकर सुखाने का काम हो रहा है।

ग्रीन बेल्ट सुरक्षित नहीं : शहर के मध्य से होकर निकले जमुरिया नाले के किनारे 25-25 ग्रीन बेल्ट है। लेकिन ग्रीन बेल्ट में भी लोगों ने भवन बना लिए हैं। यही नहीं कुछ विद्यालय भी ग्रीन बेल्ट में बन गए। जांच की बात तो यह कि जिनके भवन को ही प्रशासन अवैध मानकर ध्वस्त कराने का आदेश दे चुका है उनकी मान्यता कैसे हो गई।

1500 से ज्यादा मुकदमें चल रहे : विनियित क्षेत्र के अवर अभियंता श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि विनियमित क्षेत्र की परिधि में ग्रीन बेल्ट में भवन निर्माण, अवैध प्लाटिग व बिना मानचित्र स्वीकृत के निर्माण संबंधी 1500 से ज्यादा मुकदमें चल रहे हैं। इसी माह दो दर्जन भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए थे।

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