ग्रामीणों के विरोध से रुका चेकडैम बनाने का कार्य

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JagranWed, 16 Jun 2021 11:10 PM (IST)
ग्रामीणों के विरोध से रुका चेकडैम बनाने का कार्य

संवाद सहयोगी, नरैनी : बुंदेलखंड के तमाम प्राकृतिक जलस्त्रोत ग्रामीणों के लिए भीषण गर्मी में वरदान हैं। लेकिन लघु सिचाई विभाग इन प्राकृतिक जल स्त्रोतों पर चेकडैम बनाकर इन्हें मिटा रहा है। चितित बुजुर्गों का कहना है कि जलस्त्रोत यहां के लोगों के लिए जीवनदायक हैं। यदि चेकडैम बन गया तो ग्रामीणों को पानी के लिए बड़ी त्रासदी झेलनी पड़ेगी। ग्रामीणों के अथक प्रयासों व मांग को लेकर फिलहाल चेकडैम का कार्य रुक गया है। इससे ग्रामीणों में बड़ी खुशी है।

प्राकृतिक जलस्त्रोत सदियों से स्वच्छ व मीठा पानी दे रहे हैं। गर्मी के दिनों में जल स्त्रोतों का पानी औषधि का काम करता है। शीतल व स्वच्छ पानी लेने लोग दूर-दूर से आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी में जब जल स्तर नीचे चला जाता है तो पानी का घोर संकट खड़ा हो जाता है। बड़े नाले व पोखर सूख जाते हैं। तब इंसानों व जानवरों को पीने के पानी के लिए भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन जल स्त्रोत का पानी कभी नहीं खत्म होता। लघु सिचाई विभाग मोतियारी गांव में जल स्त्रोतों के साथ छेड़छाड़ कर चेकडैम बना रहा था। जिसका ग्रामीणों के ओर से लगातार विरोध किया जा रहा था। ग्रामीणों की ओर से लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री आवास में ज्ञापन दिया गया था। जिसके बाद अब चेकडैम बनाने का कार्य रुक गया। जिससे ग्रामीणों में खुशहाली हैं। उन्होंने बताया कि गांव में ही झरने के 300 मीटर दूर पहले भी चेकडैम बनाया जा चुका है।

- प्राकृतिक जलस्त्रोत के नीचे मनरेगा योजना से सफाई का कार्य चल रहा है जिसमें 22 मजदूर काम पर लगे हैं। यह जलस्त्रोत बहुत ही उपयोगी है जिसका पानी कभी बंद ही नही होता।

-फूला यादव, ग्राम प्रधान मोतियारी

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जलस्त्रोतों की उपयोगिता

सैकड़ों साल पुराने प्राकृतिक जल स्त्रोत से गांव के लोग पानी पीते हैं। उसमें स्नान करते हैं। उनके सारे संस्कार भी इसी प्राकृतिक जलस्त्रोत में होते हैं। यहां झरने भी हैं, जो हजारों लोगों के आस्था का केंद्र बने हैं। गर्मी में पशु-पक्षियों के लिए यही झरना सहारा हैं। इन्हीं जल स्त्रोतों के माध्यम से किसान सैकड़ों एकड़ जमीन की सिचाई भी करता है।

--------------- खत्म हो चुके हैं चेकडैम से कई स्त्रोत नरैनी के मोतियारी गांव में जहां पर चेकडैम निर्माण कराया जा रहा था वहां से करीब 300 मीटर दूरी पर पिछले वर्ष एक चेकडैम बनाया गया था। इसके बाद वहां का जलस्त्रोत खत्म हो गया था। गांव के बुजुर्गो का कहना है कि चेकडैम से जल का भराव होता है। जल स्तर ऊपर आने से स्त्रोत स्वत: समाप्त हो जाते हैं। इसके अलावा बदौसा के तुर्रा में भी कई प्राकृतिक जलस्त्रोत थे, जिन्हें चेकडैम लील गए।

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