मालती समाज में नन्ही परियों को दिला रहीं सम्मान

जागरण संवाददाता बांदा नारी सशक्तीकरण में उत्कृष्ट कार्य करने वाली मालती दीक्षित अब नन्हीं

JagranFri, 01 Oct 2021 04:34 PM (IST)
मालती समाज में नन्ही परियों को दिला रहीं सम्मान

जागरण संवाददाता, बांदा : नारी सशक्तीकरण में उत्कृष्ट कार्य करने वाली मालती दीक्षित अब नन्हीं परियों को सम्मान दिलाने की मुहिम में जुट गई हैं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से जुड़कर वह इस मुहिम को आगे बढ़ा रही हैं। बेटी के जन्म होने के बाद वह अपनी टीम के साथ घर जाती हैं। जन्मोत्सव मनाने के साथ बेटी व उसकी मां को सम्मानित कर रही हैं। समूह में विशेष कार्य के लिए उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं।

बड़ोखर खुर्द ब्लाक के त्रिवेणी गांव निवासी मालती दीक्षित अब अपने परिचय की मोहताज नहीं हैं। सामान्य घर से होने के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से वह सब कुछ हासिल किया, जो अन्य लोगों के लिए मुश्किल जरूर होते हैं। मामूली खेती किसानी पर टिके परिवार को स्वरोजगार का रास्ता दिखाया। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर रोजगार खड़ा किया और अपनी आर्थिक तरक्की की। इसके बाद जिले में तमाम महिलाओं को रोजगार की राह दिखाई। उन्हें नारी सशक्तीकरण पर राज्य स्तर पर पुरस्कार मिल चुका है। अब वह बेटियों के सम्मान को लेकर मुहिम छेड़ चुकी हैं। बेटी-बचाओ-बेटी पढ़ाओ मुहिम में जिला समन्वयक मालती दीक्षित के साथ आधा दर्जन अन्य महिलाएं भी हैं। जिले में कहीं भी बेटियों के जन्म की जानकारी होती है। वह तुरंत पहुंचती हैं और बेटी का धूमधाम से जन्मोत्सव मनाने के साथ उन्हें उपहार में कपड़े, मिठाई व फल आदि भेंटकर सम्मान बढ़ाती हैं। इसके लिए वह गांवों में लोगों को बेटियों की सुरक्षा व सम्मान के लिए जागरूक कर रही हैं।

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बेटी दो परिवारों का बनाती हैं भविष्य

अभियान की जिला समन्वयक मालती दीक्षित कहती हैं कि लोग कहते हैं कि बेटे ही बुढ़ापा का सहारा हैं, लेकिन यह मिथक है। बेटियां जी-जान लगाकर माता पिता व सास-ससुर की सेवा करती हैं। वह अपनी योग्यता व लगन से बुलंदियों को छू रही हैं। हर क्षेत्र में महारत हासिल कर रही हैं। वह कहती हैं कि बेटियों का सम्मान जिस समाज में है, वहीं सम्मान है। बेटियां पहले अपने माता-पिता के घर को संवारती हैं और फिर ससुराल में जाकर वहां भविष्य के सपने गढ़ती हैं।

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अब तक 160 बेटियों का कर चुकीं सम्मान

मालती दीक्षित बताती हैं कि शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक 160 बेटियों को सम्मान दिला चुकी हैं। इससे प्रेरित होकर मां और परिवार वाले भी बेटियों को सम्मान की नजर देख रहे हैं। अब वह इनके जन्म दिवस पर भी शामिल होंगी।

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