सहफसली खेती व मचान विधि से आगे बढ़ रहीं महिला किसान

10 बिस्वा में कमाया 55 हजार का मुनाफा 350 बेटियां तोड़ रहीं खेती में घाटे की मिथक यूट्यूब से सीख रहीं खेती की नई-नई विधि

JagranSun, 12 Sep 2021 10:42 PM (IST)
सहफसली खेती व मचान विधि से आगे बढ़ रहीं महिला किसान

बलरामपुर: घर की देहरी लांघ कुछ नया करने की ठान चुकी बेटियां व महिलाएं अब खेती को हथियार बना गरीबी को शिकस्त दे रही हैं। यह बदलाव परंपरागत खेती से उबरने की राह दिखा रही 350 बेटियों की कोशिश से हो रहा है जो गांव-गांव परंपरागत खेती की जगह वैज्ञानिक विधि से खेती की जानकारी देकर खेत, खलिहान व किसानों की तस्वीर बदलने में जुटी हैं।

रेहरा बाजार के रामपुर अरना की चमेली ने सहफसली व मचान विधि से घाटे की खेती का मिथक तोड़ा है। उसने बेड विधि से प्याज व ऊपर मचान बनाकर लौकी लगाई। कोरोना काल में प्याज व लौकी की मांग अधिक रही। इसका परिणाम रहा कि 55 हजार रुपये मुनाफा कमा लिया। सावित्री जायसवाल 2020 से डेढ़ बीघा खेत में नीचे प्याज व ऊपर करैला और घुइया के ऊपर लौकी लगाकर एक सीजन में 40 से 45 हजार रुपये की सब्जी बेच लेती हैं।

यहीं की कृष्णावती व मायावती ने घाटे की खेती की तस्वीर बदलकर मिसाल कायम किया है। इन्हें जागरूक करने वाली सुनीता जायसवाल ने बताया कि महिलाएं वैज्ञानिक खेती को लेकर ज्यादा उत्सुक हैं जो समझाने पर सरलता से तैयार हो जाती हैं।

यू ट्यूब से सीख रहे खेती के नए तरीके:

महुआ गांव के इंटर पास बलराम ने अपने जज्बे से मुश्किलों को मात दी है। आठ सदस्यीय परिवार की जीविका पांच बीघा खेत में ही चलानी थी। ऐसे में उसने यू ट्यूब से खेती के आधुनिक तरीके सीखे। 10-10 विस्वा में करैला, लौकी, परवल, भिडी, तरोई व घुईया लगा दी। वह तीसरे दिन से दो से ढाई हजार की सब्जी बेच साल भर में ढाई लाख कमा लेता है। किसानों को जागरूक कर रही संस्था पानी के जिला प्रबंधक राजीव मिश्र ने बताया कि 350 बेटियां गांव-गांव खेती के आधुनिक तरीके सिखा रही हैं।

कृषि उपनिदेशक डा. प्रभाकर सिंह ने बताया कि सहफसली व मचान विधि से किसानों ने घाटे की खेती को मुनाफेदार बनाया है जो प्रेरणादायक है।

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